भारत का भूगोल उत्तर का मैदान भाभर ,तराई ,खादर ,बांगर , रेह ,डेल्टा

भाभर ,तराई ,खादर ,बांगर , रेह ,डेल्टा,ज्वारनदमुख/एस्चुरी

स्वागत हैं आपका दोस्तों आज हम जानेगे भारतीय भूगोल में भौतिक प्रदेश पढने के लिए उपयोग होने वाली शब्दावली

भाभर क्या हैं ?

हिमालय के दक्षिण में पथरीले ढाल का क्षेत्र जहाँ नदियाँ पत्थरों के निचे लुप्त हो जाती हैं यह क्षेत्र 10 से 15 किलोमीटर तराई  के  उतर के ढाल में स्थित होता हैं यह क्षेत्र कृषि योग्य क्षेत्र नही होता हैं

तराई का मैदान 

जो नदिया भाबर में अदृश्य होती हैं वे वापस भाबर के दक्षिण में दृश्य होती हैं यह दलदल भाग होता हैं इस भूमि को कृषि योग्य बनाया जाता हैं
इसका क्षेत्रफल 15-30 KM होता हैं

भारत का भूगोल खादर  

हिमालय से नदी उतरती हैं तो बांगर और तराई को पार करके आगे अपने साथ कुछ उपजाऊ मिटटी  लाती हैं इसी उपजाऊ मिट्ठी को खादर कहते हैं 

भारत का भूगोल बांगर  

खादर उपजाऊ भूमि होती हैं ठीक इसके विपरीत जब नदी उपजाऊ मिटटी लाती हैं कुछ समय बाद वो नदी उस स्थान से प्रवाहित नहीं होकर अपना रास्ता बदल लेती हैं तो जो पुराना नदी द्वारा उपजाऊ क्षेत्र था वो धीरे धीरे अनुपजाऊ हो जाता हैं उसे ही बांगर कहते हैं 

भारत का भूगोल रेह

इसे कल्लर भी कहते हैं सिंचाई ज्यादा होने पर भूमि के ऊपर एक नमकीन जैसी परत बन जाती हैं उसी परत को रेह या कल्लर कहते हैं 

भारत का भूगोल डेल्टा 

जब नदिया बहती हैं तो अपने साथ कुछ अवसाद लाती हैं अवसाद का मतलब होता हैं (मिटटी,कंकड़ ,पत्थर,वनस्पति ) तो जब नदी अपने मुहाने पर पहुँचती हैं यानी अंतिम स्थान पर तो एक त्रिभुजाकार आकृति बनाती हैं उसी आकृति को डेल्टा कहते हैं 

भारत का भूगोल जवारनदमुख या एचुअरी 

यह डेल्टा के विपरीत होता हैं यानी जो नदिया डेल्टा नहीं बनाती वे नदियाँ जवारनदमुख बनाती हैं भारत में अरब सागर में में गिरने वाली नदिया जवारनदमुख या एचुअरी का निर्माण करती हैं वहीँ बंगाल की खाड़ीे में गिरने वाली नदियाँ डेल्टा का निर्माण करती हैं दरअसल अचशुरी में नदिया ऊपर से गिरती हैं खड्डे नुमा निर्माण हो जाता हैं यानि नदियाँ जो भी अवसाद लाती हैं वे सीधे समुद्र में गिराती हो तो use ही ज्वारनदमुख या एस्चुएरी कहते हैं नर्मदा और तपती नदिया ज्वारनदीमुख का निर्माण करती हैं

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