12th Class NCERT Physics Notes विद्युत क्षेत्र || Electric Field Important Question ||

12th Physics Notes  टॉपिक 1- विद्युत क्षेत्र  (Topic-1 Electric Field)

विद्युतिकी की परिभाषा और उसके प्रकार –

वैद्युतिकी- विज्ञान की वह शाखा जिसमें आवेशों के बारे में अध्ययन किया जाता है वैद्युतिकी कहलाती हैं।
यह दो प्रकार की होती है-

(a) स्थिर वैद्युतिकी (b) गतिक वैद्युतिकी



(a)स्थिर विद्युतिकी –

विज्ञान की वह शाखा जिसमें स्थिर आवेश के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है स्थिर वैद्युतिकी कहलाती है।

– स्थिर वैद्युतिकी में स्थिर आवेशों के कारण केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होते हैं।

(b) गतिक विद्युतिकी –

विज्ञान की वह शाखा जिसमें गतिशील आवेशों के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है गतिक वैद्युतिकी कहलाती है।
– गतिशील आवेशो के कारण विद्युत क्षेत्र व चम्बकीय क्षेत्र दोनों उत्पन्न होते हैं।



Q.2 कौनसे विद्युत् क्षेत्र उत्पन्न होंगे यदि?


विद्युत आवेश की परिभाषा-

वस्तु में इलेक्ट्रॉन की कमी या वृद्धि विद्युत आवेश कहलाती है।
या
वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह हल्के पदार्थों को आकर्षित करती हैं विद्युत आवेश कहलाती हैं जिसे Q या q से प्रदर्शित करते हैं।


आवेश के प्रकार-

आवेश दो प्रकार के होते है-(1)धन आवेश (2) ऋण आवेश
(1) धन आवेश- वस्तु में इलेक्ट्रान की कमी होना।
(2) ऋण आवेश- वस्तु में इलेक्ट्रान की वृद्धि होना।


आवेश का मात्रक-


आवेश से सम्बन्धित मुख्य तथ्य-


विभिन्न कणों पर आवेश व द्रव्यमान के मान-


आवेश के गुणधर्म –

1 विद्युत् आवेशो की योज्यता-
किसी निकाय का कुल आवेश उसमे उपस्थित विभिन्न आवेशों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।

2 विद्युत् आवेशो का संरक्षण –

आवेश को न ही उत्पन्न किया जा सकता है न ही नष्ट किया जा सकता है इसे एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है।

अर्थात किसी निकाय का कुल आवेश सदैव नियत रहता है।

3 आवेश का क्वांटीकारण-

वस्तु पर आवेश, इलेक्ट्रान के आवेश का पूर्ण गुणज होता है।



Q.2 किसी धातु के गोले को 1c आवेश से धनावेशित करने मे उससे कितने इलेक्ट्रॉन निष्कासित करने होंगे?


कूलॉम का नियम या कूलॉम के व्युत्क्रम वर्ग का नियम-

दो स्थिर बिंदु आवेशों के मध्य लगने वाले आकर्षण एवं प्रतिकर्षण बल दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती होता है तथा उनके मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
यह बल दोनों आदेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्यकारी होता है तथा माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करता है जिसे कूलाम का व्युत्क्रम वर्ग का नियम भी कहते हैं।

1 कूलॉम की परिभाषा-

यदि किसी चालक में 1 एम्पियर विद्युत धारा 1 सेकंड तक प्रवाहित हो, तो उस चालक से प्रवाहित आवेश 1 कूलाम कहलाता है।
परावेद्युतांक की परिभाषा-
किसी माध्यम की उपस्थिति में आवेशों के मध्य बल, निर्वात की तुलना में जितने गुना कम होता है उसे उस माध्यम का परावैद्युतांक अथवा आपेक्षिक विद्युतशीलता अथवा विशिष्ट परावैद्युतता कहते हैं।


कूलॉम के नियम का सदिश निरूपण-


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