हिंदी व्याकरण सर्वनाम और उसके भेद

सर्वनाम

परिभाषा- “संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम ‘कहलाते हैं।”

“राधा ने राधा के मन में सोचा कि राधा कल अवश्य राधा की सहेली के घर राधा की गाडी से जाएगी।”

उपर्युक्त वाक्य को पढ़ने से हमे यह वाक्य भद्दा-सा जान पड़ता है।
यदि इसमें निहित दोष को दूर करके लिखा जाए तो यह वाक्य निम्न प्रकार होगा-

‘”राधा ने अपने मन में सोचा कि वह कल अवश्य अपनी सहेली के घर अपनी गाडी से जाएगी।”

इस प्रकार हम पाते है कि संज्ञा शब्दों के स्थान पर क्रमश: अपने, वह तथा अपनी शब्दों का प्रयोग हुआ हैं।

इस प्रयोग से वाक्य के अर्थ में कही कोई परिवर्तन नहीं आया और वाक्य का भद्दापन भी दूर हो गया है ।

यह कहा जाता है कि भाषा में सुंदरता, संक्षिप्तता, सुविधा तथा सरलता लाने के लिए सर्वनाम का प्रयोग आवश्यक है।

सर्वनाम सभी संज्ञाओं के नाम है।

ये किसी भी संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त किए जा सकते हैँ, इसलिए हर भाषा में इनकी संख्या सीमित है; जैसे-मैं, हम , तू, आप, यह , वह, जो , कोई , कुछ , कौन , क्या आदि।

सर्वनाम का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर होता है, इसलिए संज्ञा के समान ही कारक के कारण इनमें विकार या परिवर्तन होता है; जैसै-हमने, हमको, हमसे, मैंने, मुझको, मुझसे आदि ।
इसे भी संज्ञा की तरह एकवचन या बहुवचन का रूप दिया जा सकता है ।

संज्ञा के समान इनके साथ संबोधन का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

सर्वनाम के भेद-

सर्वनाम के निम्नलिखित छ: भेद हैं :
1. पुरुषवाचक सर्वनाम
2. निश्चयवाचक सर्वनाम
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
4. संबंधवाचक सर्वनाम
5. प्रश्नवाचक सर्वनाम
6. निजवाचक सर्वनाम

1.पुरुषवाचक सर्वनाम- जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई बात कहता है , तो मुख्य रूप से तीन वाचक प्रयुक्त होते है।

1. वक्ता (बोलने वाला),
2. श्रोता (सुनने वाला),
3. अन्य (जिसके बारे में कहा जाता है) ।

इसी के आधार पर -“जो सर्वनाम कहने वाले, सुनने वाले या जिसके विषय में कहा जाए उनका बोध कराते हैं, उन्हें पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है।”

इसके मुख्य तीन भेद हैं :
1. उत्तम पुरुष
2. मध्यम पुरुष
3. अन्य पुरुष ।

1. उत्तम पुरुष- बोलने वाला या लिखने वाला व्यक्ति अपने लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग करता है, वे ‘उत्तम पुरुष सर्वनाम’ कहलाते है ; जैसे-मैं,हम,हमसब, हमलोग आदि।

2. मध्यम पुरुष- जिसे संबोधित करके कुछ कहा जाए या जिससे बातें की जाएँ या जिसके बारे में कुछ लिखा जाए, उनके नाम के बदले में प्रयुक्त होने वाले सर्वनाम मध्यम पुरुष सर्वनाम कहलाते हैं; जैसे-तू, तुम, आप, आपलोग, आपसब ।

3.अन्य पुरुष- जिसके बारे में बात की जाए या कुछ लिखा जाए उनके नाम के बदले में प्रयुक्त होने वाले सर्वनाम अन्य पुरुष सर्वनाम कहलाते हैं ; जैसे- वे,वे लोग,ये, यह,आप।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम- जो सर्वनाम पास की या दूर की वस्तु या व्यक्ति की ओर निश्चित संकेत करते हैं, वे ‘ निश्चयवाचक सर्वनाम’ कहलाते हैं। इसके मुख्य दो प्रयोग हैं :

1. निकट की वस्तुओं के लिए-यह, ये ।
2. दूर की वस्तुओं के लिए-वह, वे।

कुछ शब्द ऐसे होते हैं , जो निश्चयावाचक सर्वनाम तथा पुरुषवाचक सर्वनाम दोनों प्रकार से प्रयुक्त किए जा सकते हैँ । इसलिए उनके प्रयोग में सावधानी बरतनी आवश्यक है; जैसे-

रोहन कक्षा में प्रथम आया, इसलिए उसे पुरस्कृत किया जाएगा।(पुरुषवाचक सर्वनाम)

इस वर्ष भी उसी को पुरस्कृत किया जाएगा । (निश्चयवाचक सर्वनाम)।

3.अनिश्चयवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम के प्रयोग से किसी निश्चित प्राणी या वस्तु का बोध न हो, वे ‘अनिश्वयवाचक सर्वनाम‘ कहलाते हैँ; जैसे-कोई, कुछ।

‘कोई’ सर्वनाम का प्रयोग प्राय: प्राणीवाचक सर्वनाम के लिए होता है ; जैसे कोई तुम्हें बुला रहा है, और ‘ कुछ ‘ सर्वनाम का प्रयोग वस्तु या अप्राणीवाचक के लिए होता है; जैसे-कुछ सेव यहाँ पडे हैं। कही,किसी, कुछ आदि अनिश्चयवाचक सर्वनाम शब्द हैं।

4 संबंधवाचक सर्वनाम- वाक्य में प्रयुक्त दूसरे संज्ञा या सर्वनाम शब्दों से संबंध दिखाने वाले सर्वनाम ‘सबंधवाचक सर्वनाम’ कहलाते हैँ ; जैसे-जो, जिसने,उसने,जहाँ,वहाँ आदि भी संबंधवाचक सर्वनाम शब्द हैं।

जो सोएगा, सो खोएगा।
जो करेगा,सो भरेगा।

जिसकी लाठी, उसकी भैंस।
जो सत्य बोलता है, वह नहीं डरता।

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम का प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए होता है, उसे ”प्रश्नवाचक सर्वनाम” कहते हैँ ; जैसे-कौन, किन्हें, किस आदि प्रश्नवाचक सर्वनाम है।

जैसे-
वहाँ सीढ़ियों में कौन खड़ा है?
आज तुमने क्या खाया?
कल तुम किससे बातें कर रहे थे।

इस सर्वनामों में ‘कौन’ तथा ‘किससे’ प्राणीवाचक के लिए प्रयुक्त हुए है तथा ‘क्या’ अप्राणीवाचक के लिए।

6. निजवाचक सर्वनाम-
इसके अंतर्गत के सर्वनाम आते हैं जिनका प्रयोग वक्ता या लेखक स्वयं अपने लिए करते हैं इस प्रकार ‘वक्ता या लेखक जिन सर्वनाम शब्दों का बोध करता है और अपने लिए जिनका प्रयोग करता है उन्हें “निजवाचक सर्वनाम” कहते हैं।
जैसे- आप, अपने आप, खुद, स्वयं, स्वतः ।

जैसे-
हमें अपना काम अपने आप करना चाहिए।
स्वयं के लिए जीना व्यर्थ है।
वह स्वतः ही जान जाएगा।

Author: admin

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