हिंदी व्याकरण विशेषण और विशेषण के भेद

विशेषण

निम्नलिखित वाक्यों में आए रेखांकित शब्दों (पदों) पर ध्यान दीजिए-

1 . मोहन काली कमीज़ पहनकर स्कूल आया।
2. मेरा छोटा भाई बहुत शरारती है।
3. अपने लिए वे मीठे संतरे लेकर आए हैं।
4. मावा बनाने के लिए पाँच लीटर दूध चाहिए।
5. कुछ अध्यापक पढाना ही नहीं चाहते।

उपर्युक्त वाक्यों में ‘काली’, ‘छोटा’ तथा ‘मीठे’ शब्द अपनी-अपनी संज्ञाओं के गुण बता रहे हैं कि कमीज का रंग काला है, भाई छोटा है तथा संतरों का स्वाद मीठा है।
‘पाँच लीटर’, ‘कुछ’ शब्द अपनी-अपनी संज्ञाओं के परिमाण ( मात्रा ) बता रहे हैं।

कहने का तात्पर्य है कि समस्त रेखांकित शब्द किसी-न-किसी रूप में अपने आगे आने चाली संज्ञाओं की किसी-न-किसी विशेषता क्रो प्रकट कर रहे है।

व्याकरण में ये शब्द संज्ञा के पूर्व लगकर उसकी विशेषताओ को बताते हैँ । अत: इन्हें ‘विशेषण’ कहा जाता है।

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, मात्रा या परिमाण आदि) बताते हैं, ‘विशेषण’ कहते है।

विशेषण शब्द जिस शब्द (संज्ञा या सर्वनाम) की विशेषता बताते हैं, उन शब्दों को ‘विशेष्य’ के नाम से जाना जाता है।
जैसे-लडकी, सीता, राम, वह आदि।

विशेषण के निम्नलिखित भेद-
1. गुणबाचक विशेषण
2. संख्यावाचकविशेषण
3. परिमाणवाचक विशेषण
4. सार्वनामिक विशेषण

1. गुणवाचक विशेषण- संज्ञा या सर्वनाम के गुण या दोष का बोध कराने वाले शब्द ‘ गुणवाचक विशेषण’ कहलाते हैं; जैसे-वह व्यक्ति दयावान है।

गुणवाचक विशेषण के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रकार के विशेषण पाए जाते हैं:

1. गुण बोधक -अच्छा, दानी, न्यायी, कृपालु आदि।

2.दोषबोधक- झूठा, पापी, दुष्ट, कंजूस, अभिमानी आदि।
3. स्वादबोधक-खटूटा, मीठा, कड़वा, तीखा आदि।
4. गंधबोधक-खुशबूदार, सुगंधित, दुर्गंधित, बदबूदार आदि।
5. रंगबोधक- काला, पीला, सुनहरा, नीला, हरा आदि।
6. आकारबीधक मोटा, लंबा, छोटा, चौक्रोर, गोल आदि।
7. स्पर्शबोधक- कठोर, नरम, गुदगुदा, मुलायम, सख्त आदि।
8. ध्वनिबोधक- मधुर, कर्कश आदि।
9. कालबोधक-कल, परसों, क्षणिक, दैनिक, साप्ताहिक, मासिक आदि।
10. स्थानबोधक- ग्रामीण, शहरी, विदेशी, जयपुरी, चीनी आदि ।
11. दशाबोधक- रोगी, निरोगी, रुग्ण,बीमार आदि ।
12. स्थितिबोधक-अगला, पिछला, पहला, पाँचवाँ, अंतिम आदि ।
13. दिशाबोधक-पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, भीतरी, बाहरी आदि ।
14. अवस्थाबोधक- गीला, सूखा, नम, शुष्क आदि।

2. संख्यावाचक विशेषण- जिस विशेषण शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम को संख्या का बोध होता है, वे ‘संख्यम्बाचक विशेषण’ कहलाते हैं।
संख्यावाचक विशेषण के दो भेद है-
(1) निश्चित संख्यावाचक विशेषण
(2) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण ।

(1) निश्चित संख्यावाचक विशेषण- जिनसे निश्चित संख्या का बोध होता है, वे ‘निश्चित संख्यावाचक विशेषण’ कहलाते है;
जैसे-दस विद्यार्थी, पाँच केले, चार वृक्ष आदि।

(2) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण- इनसे निश्चित संख्या का बोध नहीं होता; जैसे: कुछ आम, थोडे केले, कुछ लडके , कई दर्शकगण आदि।

3. परिमाणवाचक विशेषण- मात्रा या तोल बताने वाले विशेषणों को “परिमाणवाचक विशेषण” कहते हैँ; जैसे : दस किलो दूध, चार किलो आटा, चार गज ज़मीन, थोडा अनाज आदि।

परिमाणवाचक विशेषण के भी 2 भेद है:
(1) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण
(2) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण ।
(1) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण- जिन शब्दों में निश्चित परिमाण का बोध होता है , वे ‘निश्चित परिमाणवाचक विशेषण’ कहलाते हैं; जैसे- चार किलो दाल, दो मीटर कपड़ा आदि।

(2) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण- जिन शब्दों से परिमाण की अनिश्चितता का बोध हो, वे ‘अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण’ कहलाते है; जैसे: कुछ दाल, थोड़ा आटा, बहुत चीनी आदि।

4. सार्वनामिक विशेषण- जिन सर्वनामों का प्रयोग विशेषण के रूप में होता है, वे ‘सार्वनामिक विशेषण’ कहलाते है;
जैसे: वह लड़का भला है ।
कोई स्त्री दरवाजे पर आकर खडी है।
यह पुस्तक तुम्हारी है।

इन वाक्यों में वह, कोई तथा यह सर्वनाम होते हुए भी विशेषण के रूप में प्रयुक्त किए गए है।
इसीलिए ये ‘सार्वनामिक विशेषण’ कहलाते हैं।

पुरुषवाचक ( मैं, हम, तू, तुम) तथा निजवाचक ( आप) सर्वनामों के अलावा शेष सभी सर्वनाम, सार्वनामिक रूप में प्रयोग में लाए जाते है।
पाया जाता है कि पुरुषवाचक तथा निजवाचक सर्वनाम के संबंधकारकीय रूप विशेषण के समान प्रयुक्त किए जा सकते हैँ ;
जैसे- मैं से मेरा,मेरी;
तुम से तुम्हारा, तुम्हारी
तथा हम से हमारा ,हमारी।

Author: admin

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