राजस्थान के राष्ट्रीय पार्क एवं बाघ परियोजनाएँ National Part of Rajasthan

राजस्थान के राष्ट्रीय पार्क एवं बाघ परियोजनाएँ

गोडावण (ग्रेट इण्डियन बस्टर्ड)-

★बस्टर्ड ब्रीडिंग सेंटर जैसलमेर में प्रस्तावित इस केंद्र पर गोडावण संरक्षण का कार्य किया जाएगा।
★गोडावण पक्षी को तूकदार, नाहर, गुंजन, हुंकनाआदि नामों से जाना जाता है।
★यह पक्षी सोरसन(बाराँ), सोंखलिया(अजमेर), जैसलमेर (मरू राष्ट्रीय उद्यान), बाड़मेर व बीकानेर क्षेत्रों में पाया जाता है।
★यह लगभग 4 फीट ऊंचा होता है।
★तारामीरा गोडावण का भोजन है।
★ राज्य में यह पक्षी विलुप्त की कगार पर है।

ऐमू-

★ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पक्षी ऐमू का राजस्थान में सीकर, झुंझुनू ,सरदारशहर, बीकानेर, श्रीगंगानगर व जैसलमेर आदि स्थानों पर पालन शुरू किया गया है।
★हनुमानगढ़, बीकानेर तथा गंगानगर जिले में सबसे पहले ऐमू फार्मिंग शुरू हुई है।
★”रामसीसर भेडवालिया” सरदारशहर में स्थित चुरू जिले का पहला ऐमू फार्म।
★किरडोली (सीकर) यहाँ ऐमू फार्म हाउस विकसित किया गया है।

गिद्ध-

★शेखावाटी में केवल इजिप्शियन गिद्ध बचे हैं जिन्हें स्कैवेंजर या सफेद गिद्ध कहते हैं यह चुरू में पाए जाते हैं।
★गिद्धों की घटती संख्या के पीछे डाइक्लोफिनेक सोडियम दवा महत्वपूर्ण कारण है।
★गिद्धों को प्रकृति का निजी सफाईकर्मी कहा जाता है।
★पक्षी विशेषज्ञ डॉक्टर सलीम अली ने गिद्धों को भगवान की निजी भस्मक मशीन कहा।
★चूरू की मरू क्षेत्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (आजरी) शेखावटी में सफेद गिद्धों के प्रजनन पर अनुसंधान कर रही।
★चूरू स्थित मरू क्षेत्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (आगरी) के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अवतार नारायण शर्मा है।
★प्रदेश में गिद्धों के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए जोधपुर में रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया जाएगा।
★ गिद्ध के लिए प्रवेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र जोहरबीड़ (बीकानेर) में बनाया गया है।
★ बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी गिद्धों का तीसरा प्रजनन केंद्र राजस्थान में स्थापित करेगी।

★राजस्थान की बाघ परियोजनाएं★

1.रणथंभौर अभयारण्य (सवाई माधोपुर)-

★भारत की सबसे छोटी बाघ परियोजना।
★भारतीय बाघों का घर कहलाता है।
★रणथंभौर बाघ परियोजना को 1973 में बाघ परियोजना के प्रथम चरण में प्रारंभ कर दिया गया था।
★ इस अभ्यारण में गणेश जी का त्रिनेत्र मंदिर स्थित है जिसमें श्रद्धालु गणेशजी को शादी के अवसर पर प्रथम नियंत्रण देने हेतु आते हैं।
★यहां जोगी महल स्थित है व क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय खोला जा रहा है।

2. सरिस्का अभयारण्य (अलवर)-

★राजस्थान का दूसरा बाघ परियोजना क्षेत्र।
★यह हरे कबूतरों के लिए प्रसिद्ध है।
★ सरिस्का अभयारण्य में स्थित मंदिर-पांडुपोल हनुमान जी, नीलकंठ महादेव, भर्तृहरि, तालवृक्ष।
★बाघ विहीन हुआ अलवर स्थित सरिस्का अभयारण्य 28 जून 2008 को बाघ के आने के साथ फिर से आबाद हो गया है।
★यह विश्व में टाइगर स्थानान्तरण का पहला सफल प्रयोग है।

3. मुकुंदरा हिल्स (कोटा)-

★ राजस्थान सरकार ने मुकुंदरा हिल्स को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया है।
★यह 4 जिलों को जोड़कर बनाया गया है कोटा, बूंदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़।
★राजस्थान की तीसरी बाघ परियोजना है।
★ इस का कुल क्षेत्रफल 759.99 वर्ग किलोमीटर है।

राजस्थान के 3 राष्ट्रीय पार्क-

1. रणथंभौर राष्ट्रीय पार्क (सवाई माधोपुर)-

★ भारत की सबसे छोटी बाघ परियोजना।
★ यह भारतीय बाघों का घर कहलाता है।
★ यहां रेंटेड तीतर व दुर्लभ काला गरुड़ पाए जाते हैं।
★ यह राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय अभयारण्य और टाइगर प्रोजेक्ट है।
★ रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों के संरक्षण हेतु 6 वर्ष के लिए इंडिया इको डेवलपमेंट परियोजना (जैफ़) विश्व बैंक के सहयोग से चलाई गई है।
★ रणथम्भौर अभ्यारण को 1955 में अभयारण्य का दर्जा एवं 1 नवंबर 1980 को राजस्थान के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला।
★ बाघ शिखर सम्मेलन- अक्टूबर-नवम्बर 2010 में बाघों पर विश्व शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
राजस्थान यह सम्मेलन आयोजित करने वाला भारत का पहला राज्य है।
★ रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से कूनो अभयारण्य (मध्यप्रदेश) के मध्य बाघ कॉरिडोर बनाए जाने की घोषणा की गई है।
★फोटो ट्रैप पद्धति- राजस्थान वन विभाग द्वारा मई, 2009 में बाघों की गणना हेतु इस विधि का प्रयोग किया गया।

मछली-
★ रणथंबोर राष्ट्रीय पार्क की बाघिन का नाम है
★ बाघ पानी में जाने से डरते हैं लेकिन मछली ऐसी एकमात्र बाघिन है, जो पानी में घुसकर भी शिकार कर लेती है इसलिए मछली का नाम लिया क्या है।
★इसे जयपुर के वन्यजीव प्रेमियों ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा है।

‘मछली’ बाघिन के उपनाम-
1. रणथम्भोर क्वीन
2. लैडी ऑफ द लेक
3. क्रोकोडाइल किलर
4. टी-16
5. मदर क्वीन

★कैमरा क्वीन- मछली बाघिन को कहते है, क्योंकि दुनिया में सबसे ज्यादा करीब 11 करोड फोटो इस बाघिन के खींचे गए हैं।
★जनवरी 2014 में रणथम्भौर नेशनल पार्क से यह बाघिन लापता होने के कारण चर्चा में आई।
★मछली पर 15 अंतरराष्ट्रीय फिल्में बन चुकी है।
★मछली रणथंबोर पार्किंग घोषित ब्रांड अंबेसडर है पार के कुल बागों में से 80 फ़ीसदी इसी की संतान है
★मछली की उम्र 17 साल है और यह प्राकृतिक पर्यावास में रह रही दुनिया की सबसे बूढ़ी बाघिन है।

“कृष्णा”-

★रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की सबसे प्रसिद्ध बाघिन मछली (टी-16) की बेटी टी-17 को कृष्णा नाम दिया गया है।
★छायाकार एस. नल्लामुत्थु ने मछली को लेकर टाइगर क्वीन नाम से डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनाई है, जिसे नेशनल ज्योग्राफिक चैनल पर इंग्लैंड से जारी किया गया।
★फतेहसिंह राठौड़(जोधपुर)- रणथम्भौर टाइगर प्रोजेक्ट को विश्व मानचित्र पर स्थापित किया।
एवं टाइगर मैन के रूप में प्रसिद्ध हुए।
★टाइगर प्रोटेक्शन फ़ोर्स- रणथम्भौर में स्पेशल टाइगर फ़ोर्स का गठन किया जायेगा।

★कुमट कमेटी- रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में अवैध शिकार क् कारण बाघों की संख्या में कमी होने के कारण आर.एस. कुमट की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया।

2.केवलादेव राष्ट्रीय पार्क/घना पक्षी विहार (भरतपुर)-

★ सन 1956 में इसे अभयारण्य का दर्जा मिला। इसे 1981 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
★ यूनेस्को घना को हेरिटेज वर्ल्ड साइट से बाहर करने की चेतावनी दे चुका है
★ यूनेस्को से 1985 में विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने वाला यह राज्य का एकमात्र अभयारण्य है
★ गंभीरी और बाढ़ गंगा नदिया इस अभयारण्य से होकर गुजरती है
★ यहां लगभग 400 देशी-विदेशी पक्षी पाए जाते हैं घना में पाए जाने वाले शिकारी पक्षी स्टेपी ईगल,व्हाइट ईगल, फिशिंग ईगल, पैराग्रीन फाल्कन,मास्र, स्पैरो हॉक, लॉर्ज हॉक, काप उल्लू।
★ एशिया की पक्षियों की सबसे बड़ी प्रजनन स्थली जिसे पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है
★ इस अभयारण्य में लगभग 71 प्रजातियों की तितलियां पाई जाती है
★साइबेरियन सारस- यह इस अभयारण्य में अक्टूबर नवंबर माह में सर्दियां व्यतीत करने हेतु रूस से आते हैं और फरवरी के अंत अथवा मार्च के प्रारंभ में वापस प्रस्थान करते हैं।
★साइबेरियन क्रेन ब्रीडिंग केंद्र- घना में अन्तराष्ट्रीय क्रेन फेडरेशन एवं विश्व वन्यजीव कोष के सहयोग से स्थापित किया जायेगा।
★ यह भारत के प्रमुख पर्यटन परिपथ सुनहरा त्रिकोण:-दिल्ली-आगरा-जयपुर पर अवस्थित है।
★ गोवर्धन ड्रेनेज प्रोजेक्ट- केवलादेव राष्ट्रीय पार्क में पानी की समस्या दूर करने हेतु शुरू किया गया है इसके तहत करौली स्थित पांचना बांध से पानी की आपूर्ति की गई है।
★अजान बाँध-घना पक्षी विहार बाँध से 15 MCFT पानी दिया जायेगा।

3. मुकुन्दरा (दर्रा) हिल्स राष्ट्रीय पार्क (कोटा)-

★ मुकुंदरा हिल्स को राष्ट्रीय पार्क का दर्जा देने के संदर्भ में 9 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की गई।
★ राजस्थान में राष्ट्रीय पार्कों की संख्या 2 से बढ़कर 3 हो गई।
★यहां कोटा नरेश राव मुकंद सिंह द्वारा स्थापित अबला मीणी महल है।
★ इसके उत्तर व पश्चिम में चंबल, पूर्व क्षेत्र में कालीसिंध, दक्षिण क्षेत्र में आहू तथा आमझर नदियां प्रवाहित होती है।
★एलेक्जेंड्रिया पेराकीट (गागरोनी तोता)- मुकुन्दरा हिल्स नेशनल पार्क में पाया जाने वाला विशेष प्रजाति का तोता, जिसे हीरामन तोता तथा हिन्दुओ का आकाश लोचन भी कहा जाता है।
जो मानव की आवाज की नकल कर सकता है।
★मुकुन्दरा पहाड़ी क्षेत्र में ही दर्रा, जवाहर सागर और चम्बल अभ्यारण्य शामिल है।

Author: admin

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