राजस्थान का इतिहास मुग़ल राजपूत सम्बद्ध #mugal_rajput_sambndh

Mugal Rajput sambdh rajasthan ka itihas

मुग़ल राजपूत सम्बद्ध राजस्थान का इतिहास

मुग़ल साम्राज्य की स्थापना : 1526 बाबर ने की

**मुग़ल शासक **

बाबर
हुमायु
अकबर ( मुग़ल राजपूत संबधो की शुरुआत अकबर के समय से )
जहाँगीर
शाहजहाँ
औरंगजेब
बहादुर शाह -1
फरुर्ख्सियर (अंतिम वैवाहिक सम्बद्ध मारवाड़ के अजित सिंह की पुत्री से )

*मुगलों के समकालीन राजस्थान की प्रमुख रियासते और शासक *
मेवाड़ :- महाराणा उदयसिंह ,महाराणा प्रताप ,अमरसिंह ,कर्ण सिंह
मारवाड़ :- राव चंद्रसेन ,मोटा राजा उदयसिंह , गजसिंह, जसवंत सिंह, अजित सिंह
आमेर :- भारमल ,भगवंतदास,मानसिंह ,मिर्ज़ा राजा जयसिंह ,सवाई जयसिंह
बीकानेर :- राव कल्याणमल ,रायसिंह ,कर्ण सिंह ,अनूप सिंह ,स्वरुप सिंह
जैसलमेर :- हरराय भाटी,
बूंदी :- सुरजन सिंह हाड़ा

तथ्य

⇨अकबर ने राजपूतो से सम्बद्ध बनाने के लिए “सुलहकुल की निति” अपनाई
⇨सुलहकुल निति के तहत –
1. वैवाहिक सम्बद्ध
2. मित्रता पूर्ण सम्बद्ध
3. आक्रमण की निति
⇨अकबर का उद्धेश्य –
1. दरबार में शक्ति संतुलन की स्थापना करना
2.राजपूतो के सहयोग से साम्राज्य का विस्तार करना
⇨सम्बद्ध बनाने में :-
→आमेर ,मारवाड़ ,बीकानेर और जैसलमेर रियासतों ने वैवाहिक सम्बद्ध बनाये
→बूंदी रियासत ने मित्रता पूर्ण निति अपनाई
→मेवाड़ रियासत ने आक्रमण की निति अपनाई और मुगलों की अधीनता स्वीकार नही की

*वैवाहिक संबद्ध*
**आमेर रियासत से सम्बद्ध **
⇨पहली रियासत वैवाहिक सम्बद्ध बनाने वाली – आमेर
⇨शासक :- भारमल
भारमल ने अपनी पुत्री हरखू बाई का विवाह अकबर के साथ करके पहला मुग़ल राजपूत सम्बद्ध बनाया हरखू बाई का नाम बेगम मरियम उज्ज्मानी रखा जहाँगीर हरखू बाई का पुत्र था
भारमल के पौत्री और भगवानदास की पुत्री मान बाई का विवाह अकबर के पुत्र जहाँगीर के साथ करके राजपूत मुगलों का दूसरा वैवाहिक सम्बद्ध था
**मारवाड़ रियासत से सम्बद्ध **
⇨मारवाड़ के शासक मोटा राजा उदय सिंह ने अपनी पुत्री जगत गुंसाई का विवाह अकबर के पुत्र जहाँगीर से किया यह जहाँगीर का दूसरा विवाह था
⇨मारवाड़ रियासत में दूसरा वैवाहिक सम्बद्ध अजित सिंह की पुत्री इंद्र कुंवरी का फरुर्ख्सियर के साथ किया लेकिन यह मुग़ल राजपूतो का अंतिम विवाह था

नोट :- इतिहास में कोई उल्लेख नहीं हैं की अकबर की पत्नी जोधा बाई थी, कई इतिहासकार हरखू बाई /हरखू कंवर को ही जोधा बाई मानते हैं

**अन्य तथ्य**

⇨मेवाड़ एक मात्र ऐसी रियासत थी जिसने अकबर के जीवनकाल में मुगलों की अधिनता स्वीकार नही की जहॉंगीर कालीन राजपूत नीति की सबसे बड़ी उपलब्धि 1615 ई0 में मुगल-मेवाड़ सन्धि थी उस समय मेवाड़ के शासक अमर सिंह थे उन्होंने अपने पुत्र कर्ण सिंह के कहने पर मुगलों से संधि की लेकिन कोई वैवाहिक सम्बद्ध नही बनाये और ना ही मुगल दरबार में उपस्थित हुए वास्तविक में मुगलों से संधि कर्ण सिंह ने करवाई लेकिन उस समय शासक अमरसिंह थे इसलिए मुग़ल मेवाड़ संधि अमरसिंह के समय मानी जाती हैं
⇨ जहॉंगीर ने मारवाड़ के महाराजा सूरसिंह को सवाई राजा की उपाधि दी थी।
⇨ जहॉंगीर की मृत्यु के बाद जगत गुसाई का पुत्र शाहजहॉं मुगल बादशाह बना।
⇨शाहजहॉं के काल मे आमेर के महाराजा मिर्जा राजा जयसिंह, जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह, बीकानेर के महाराजा करणी सिंह, उदयपुर के महाराणा राजसिंह ने मुगलों का पूर्ण समर्थन एवं सहयोग दिया था
⇨शाहजहॉं की तरफ से करणीसिंह को जंगलधर बादशाह की उपाधि दी थी। क्योकि उज्बेकिस्तान अभियान सभी राजपूतो के साथ भेजा गया लेकिन उज्बेक जनता के विद्रोह करने पर अभियान असफल रहा और करणी सिंह सभी राजपूतो को सुरक्षित लेकर आये

⇨आमेर के शासक भगवंतदास और उनके पुत्र मानसिंह राजपूतो में अकबर के सबसे भरोसेमन्द व्यक्ति थे !मानसिंह को अकबर ने फर्जंद की उपाधि दी फर्जंद अर्थात बेटे के सामान और मानसिंह ने अकबर के कई अभियानों में नेतृत्व किया जिसमे हल्दीघाटी का युद्ध ,बंगाल बिहार और अफगान अभियान शामिल थे !मानसिंह के बाद आमेर के शासक मिर्जा राजा जयसिंह बने मिर्जा राजा को मिर्ज़ा की उपाधि शाहजहाँ ने दी इन्होने तीन मुग़ल बादशाहों की सेवा की थी जहाँगीर की ,शाहजहाँ की और औरंगजेब की मिर्जा राजा के बाद सवाई जयसिंह शासक बने जिनको सवाई की उपाधि औरंगजेब ने दी इन्होने 7 मुग़ल बादशाहों की सेवा की औरंगजेब, बहादुर शाह, जहांदार शाह ,फरुर्ख्सियर,रफ़ी उर दरजात ,रफ़ी उर दौला ,मुहम्मदशाह
1563 में मेड़ता दुर्ग अकबर ने अधिकार किया जो मारवाड़ की सीमा में स्थित था

⇨1567 -68 में उदयसिंह के समय अकबर द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण किया गया रलेकिन उदयसिंह ने अधीनता स्वीकार नही की 1569 में अकबर ने रणथम्भोर के शासक अर्जुन हाडा के खिलाफ अभियान भेजा !इन सब विजयों से प्रभावित होकर कई राज्यों ने अधीनता स्वीकार कर ली जिसमे बीकानेर ,जैसलमेर ,मारवाड़ , आदि थे !
⇨बीकानेर के शासक राव कल्याणमल और उनके दोनों पुत्रो ( रायसिंह और पृथ्वीराज) के साथ अकबर ने 1570 में नागौर दरबार लगाया वहां पर अधीनता स्वीकार कर ली !
सन 1576 ई में मुगलों ने मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप के विरुद्ध अभियान भेजा जिसे हल्दीघाटी का युद्ध कहा जाता है प्रताप युद्ध हांर जाने के बावजूद विरोध जारी रखा और अधीनता स्वीकार नही की
⇨1578 तक राजस्थान का अधिकांश भाग मुगलों के अधीन आ चूका था

संधि स्वीकार करने वाले राजपूतो के समक्ष निम्न शर्ते थी :-
→मुग़ल सम्राट की संप्रभुता स्वीकार करना
→निर्धारित वार्षिक नजराना देना
→सैनिक सेवा प्रदान करना
→अन्य राज्यों से संघर्ष पर मुग़ल सम्राट की मध्यस्था संधि को भंग नही करना

बदले में राजपूतो को भी निम्नलिखित सुविधा दी गयी :-
→शासक और उसके वंश को रक्षा का आश्वाशन
→राज्यों की सीमा पर मुगलों द्वारा आक्रमण नही किया जाएगा
→धार्मिक एंव सांस्क्रतिक मामले में अहस्तक्षेप का आश्वाशन

Author: admin

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