Saturday, 15 June 2019

Rajasthan Gk राजस्थान का सामान्य ज्ञान सम्पूर्ण अध्ययन

Rajasthan Gk Notes
hello friends आज हम इस आर्टिकल में सम्पूर्ण राजस्थान के सामान्य ज्ञान का समग्र अध्यन करेंगे और जानेगे rajsthan Gk को किस प्रकार पढ़ें राजस्थान के सामान्य ज्ञान(rajasthan Gk) में हम राजस्थान के निम्न 4 विषय पढ़ते हैं !

राजस्थान का भूगोल एंव अर्थव्यवस्था


राजस्थान का इतिहास


राजस्थान की कला एंव संस्कृति


राजस्थान की राजनीती एंव प्रशासन


आइयें जानते हैं अलग अलग विषयों का क्या पाठ्यक्रम हैं और किस प्रकार हम rajasthan Gk की कम समय में बेहतरीन तैयारी कर सकते हैं
राजस्थान में होने वाले सभी तरह के परीक्षाओं में राजस्थान Gk का बहुत बड़ा भाग रहता हैं चाहे वो RAS PRE MAINS , PATWARI , SI,GRAMSEVAK , Rajasthan Polie Exam या अन्य किसी भी प्रकार की परीक्षा जो RPSC और RSMSSB द्वारा आयोजित की जाती हैं सबमे rajsthan Gk का Part होता हैं

राजस्थान का भूगोल Rajasthan Geography

राजस्थान के भूगोल में हम निम्न topics को पढ़ते हैं
1.राजस्थान का सामान्य परिचय - राजस्थान के सामान्य परिचय में हम राजस्थान की आकृति , राजस्थान की स्थिति एंव विस्तार , राजस्थान की सीमा , राजस्थान का क्षेत्रफल आदि को पढ़ते हैं !

2. राजस्थान के भौतिक प्रदेश :- राजस्थान को चार भौतिक प्रदेशों में बांटा गया हैं
(i) पच्छिमी मरुस्थल-पच्छिमी मरुस्थल अरावली के पच्छिम में और पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ भाग हैं
(ii)अरावली पर्वतीय प्रदेश -अरावली राजस्थान को दो भागों में बांटती हैं यह राज्य के बीचों बीच गुजरती हैं
(iii) पूर्वी मैदान -पूर्व का मैदान अरावली के पूर्व में हरियाणा, उतरप्रदेश से लगा हुआ भाग
(iv) दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश -मध्यप्रदेश से लगा हुआ भाग हाडोती प्रदेश या दक्षिण पूर्वी पठारी प्रदेश कहलाता हैं

3.राजस्थान की जलवायु - राजस्थान को 5 जलवायु प्रदेशों में बांटा गया हैं
(i)उष्णकटिबंधीय शुष्क जलवायु -उष्णकटिबंधीय शुष्क जलवायु पच्छिमी मरुस्थल के चार जिले आते हैं जो पाकिस्तान की सीमा से लगे हुए है श्री गंगानगर , बीकानेर , जैसलमेर , बाड़मेर ये जिले 25 सेंटीमीटर वर्षा रेखा के पच्छिम में स्थित हैं !
(ii)उष्णकटिबंधीय अर्धशुष्क जलवायु -उष्णकटिबंधीय अर्धशुष्क जलवायु इसमें पच्छिमी मरुस्थल के 8 जिले आते हैं जो अरावली के पच्छिम में स्थित हैं और 25 सेंटीमीटर वर्षा रेखा के पूर्व में स्थित हैं इसमें , हनुमानगढ़, जोधपुर, जालौर, सीकर,नागौर, झुझुनू,चुरू तथा पाली का भाग आता हैं
(iii)उष्णकटिबंधीय उपाद्र जलवायु-उष्णकटिबंधीय उपाद्र जलवायु में अरावली पर्वत माला में स्थिति जिले आते हैं इसमें जयपुर, अजमेर, उदयपुर, भीलवाड़ा व सिरोही जिले आते हैं
(iv)उष्णकटिबंधीय आद्र जलवायु- उष्णकटिबंधीय आद्र जलवायु में अरावली के पूर्व में स्थित जिले आते हैं बांसवाडा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर द.पू. कोटा, बारां, झालावाड़
(v)उष्णकटिबंधीय अतिआद्र जलवायु-राजस्थान का दक्षिण पूर्व भाग जिसे हाडौती प्रदेश कहते हैं इसमें 4 जिले आते हैं कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड
निचे दिया गया चार्ट राजस्थान के भूगोल को समझने में बहुत ही महत्वपूर्व भूमिका निभाएगा इसे अच्छे से समझे

4.राजस्थान का अपवाह तंत्र :-अपवाह तन्त्र में हम राजस्थान की नदियाँ , प्रमुख झीलें , नहरें पढ़ते हैं राजस्थान को 3 अपवाह तंत्र में बांटते हैं (i) (i) (i)

Monday, 22 April 2019

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Thursday, 11 April 2019

राजस्थान की झीलें Rajasthan GK

राजस्थान की झीले


hello friends आज हम इस आर्टिकल में राजस्थान की झीलों के बारे में पढेंगे
राजस्थान की झीलों को दो भागों में बांटा जा सकता है
(i)मीठे पानी की झीलें एवं
(ii)खारे पानी की झीले।
राज्य की खारी झीलों को 'टेथिस सागर' का अवशेष माना जाता है।

खारे पानी की झीलें-



सांभर झील (जयपुर-नागौर-अजमेर)-


सांभर झील 27° से 29° उत्तरी अक्षांशो एवं 74° से 75° पूर्वी देशांतरो के मध्य जयपुर एवं नागौर जिलों में स्थित है।

यह भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील हैं सांभर की समुद्रतल से औसत ऊंचाई 370 मीटर है।

इस जेल में मेंथा (मेढा),  रुपनगढ़ ,खारी, खंडेला इत्यादि नदियों सहित विभिन्न नाले जल लाते है।

भारत सरकार की 'हिंदुस्तान नमक कम्पनी' द्वारा 1964 में 'सांभर साल्ट परियोजना' प्रारम्भ की गई, जो यहाँ पर नमक का उत्पादन करती है

यहां पर सोडियम सल्फेट बनाने का एक कारखाना भी है।

देश में नमक उत्पादन में 8% सांभर झील से प्राप्त किया जाता है।

यहां पर मुग़ल काल से ही नमक निकाला जा रहा है

डीडवाना झील (नागौर)-


27° उत्तरी अक्षांश एवं 74° पूर्व देशांतर पर स्थित डीडवाना झील की लंबाई लगभग 4 किलोमीटर चौड़ाई 3 से 6 किलोमीटर है यहां पर वर्षभर नमक तैयार किया जाता है

यहां पर राजस्थान सरकार द्वारा सोडियम सल्फेट बनाने का सबसे बड़ा संयंत्र स्थापित किया गया है।
क्लोराइड की जगह सल्फेट की मात्रा अधिक होने से यहां का नमक खाने में अयोग्य है।

इसका उपयोग चमड़ा व रंगाई छपाई उद्योग में किया जाता है (औद्योगिक नमक)


लूणकरणसर झील (बीकानेर)-


यह झील उत्तरी राजस्थान में बीकानेर जिले में बीकानेर-श्रीगंगानगर मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 15 पर लूणकरणसर कस्बे के निकट स्थित है।

यह उत्तरी राजस्थान की एकमात्र खारे पानी की झील है।

खारापन कम होने की वजह से स्थानीय मांग की पूर्ति का ही नमक उत्पादित होता है।


राजस्थान में खारे पानी की अन्य प्रमुख झीले-

(1) कावोद एवं पोकरण (जैसलमेर)
(2) डेगाना एवं कुचामन (नागौर)
(3)कोछोर एवं रैवासा (सीकर)
(4) फलौदी (जोधपुर)।

सांभर,डीडवाना,पचपदरा में छोटी छोटी नामक उत्पादक निजी संस्थाएँ है,जिन्हें स्थानीय भाषा मे 'देवल' कहते है।

राजस्थान में नमक की सबसे बड़ी मंडी नावां (नागौर) है

मीठे पानी की झीलें-



जयसमंद झील (उदयपुर)-



उदयपुर से 5 1 किमी. द .पू. में स्थित इस झील का निर्माण मेवाड़ के महाराणा जयसिंह द्वारा 1685 ईं. में गोमती नदी पर बाध बनाकर करवाया गया था ।

जयसमन्द विश्व की मीठे पानी की दूसरी सबसे बडी कृत्रिम झील है, जिसे स्थानीय लोग 'ढेबर झील' के नाम से जानते हैँ।

झील में कुल सात टापू हैं, जहां भील एवम  मीणा जनजाति के लोग निवास करते हैं । इनमें सबसे बड़े टापू का नाम 'बाबा का भागड़ा' एवं दूसरे बडे का नाम 'प्यारी' है।

'बाबा का भागडा' पर 'आइलैण्ड रिसोर्ट ' नामक होटल स्थित है।

1950 ईं. में जयसमन्द झील से श्यामपुरा एवं भाट नहरें निकाली गई।

जयसमंद के निकट एक पहाडी पर 'चित्रित हवामहल' एवं रूठी रानी का भव्य महल स्थित है, जहाँ पर उदयपुर रियासत की शीतकालीन राजधानी होती थी।


राजसमंद झील (राजसमंद)-



यह राज्य की एकमात्र ऐसी झील है जिस पर किसी जिले का नामकरण हुआ है।

राजसमन्द झील का निर्माण उदयपुर के महाराणा राजसिंह द्वारा 1662 ईं. में छोटी गोमती नदी पर बाँध बनवाकर किया गया।

यह झील राजसमन्द जिले में कांकरोली रेलवे स्टेशन के निकट स्थित है।

झील का उत्तरी भाग 'नौ चौकी' कहलाता है जहॉ पर सफेद संगमरमर के 25 विशाल शिलालेखों पर लिखी गई 'राजप्रशस्ति' में मेवाड साम्राज्य की स्थापना से लेकर राजसिंह तक का इतिहास संस्कृत भाषा में लिखा गया है।

'राजप्रशस्ति महाकाव्य' की रचना महाराणा राजसिंह के दरबारी कवि 'रणछोड़ भट्ट' ने की थी।

राजसमन्द झील के किनारे 'घेवर माता का मन्दिर' स्थित है।

पिछोला झील (उदयपुर)-



चौदहवीं शताब्दी में "राणा लाखा" के शासनकाल में एक बंजारे द्वारा पिछोली गांव के निकट इसका निर्माण करवाया गया था । महाराणा उदयसिंह ने इसकी मरम्मत करवाईं।

वर्तमान में यह मनोरम झील उदयपुर नगर के पश्चिम में लगभग 7 किमी. की लम्बाई में फैली है।
सीसारमा व बुझड़ा नदियां इस झील को जलापूर्ति करती हैं।
झील में स्थित दो टापुओं पर 'जगनिवास' एबं 'जगमंदिर' महल बने हुए हैं । यहां लेक पैलेस होटल है।

महाराणा कर्णसिंह के समय जगमंदिर महल में शहजादा खुर्रम (शाहजहां) ने अपने पिता जहाँगीर से विद्रोह के समय शरण ली थी।

जगमंदिर महल में ही 1857 ईं. में राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महाराणा स्वरूप सिंह ने नीमच की छावनी से भागकर आए 40  अंग्रेजों को शरण देकर क्रांतिकारियों से बचाया था।

जगनिवास महल (लैक पैलेस) विश्व के सुन्दरतम महलों में से एक माना जाता है।

इस महल का निर्माण महाराणा जगतसिंह ने 1746 ईं. में करवाया था।

पिछोला झील के किनारे चामुण्डा माता का मंदिर स्थित है जहॉ देवी के पद-चिन्हों (पगल्या) की पूजा की जाती है।

पिछोला के किनारे 'उदयपुर का राजमहल' (city palace) बना हुआ है।

फतेहसागर झील (उदयपुर)-



उदयपुर नगर के उत्तर में स्थित यह झील एक नहर (स्वरूप सागर) द्वारा पिछोला से जुडी हुईं है।

फतेह सागर का निर्माण महाराणा जयसिंह ने 1687 ईं. मे करवाया था, बाद में महाराणा फतेह सिंह ने 1900 ईं. में इसका जीर्णोद्धार करवाया।

इसकी नींव का पत्थर ड्यूक आँफ कनॉट द्वारा रखे जाने के कारण इसे 'कनॉट बाँध ' भी कहते हैँ ।

फतेहसागर झील के किनारे मोती मगरी में महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ धातु प्रतिमा (प्रताप स्मारक) लगी हुईं है।
निकट ही 'सहेलियों की बाडी' नामक सुंदर बगीचा स्थित है।

जिसका निर्माण महाराणा संग्राम सिह द्वितीय द्वारा तथा पुनर्निर्माण महाराणा फतेहसिंह द्वारा करवाया गया था।

फतेहसागर झील में एक टापू पर 'नेहरू पार्क' तथा दूसरे पर 'सौर वेधशाला' स्थित है।

पुष्कर झील (अजमेर)-



अजमेर से 11 किमी. की दूरी पर उत्तर-पश्चिम में अजमेर-नागौर मार्ग (राष्ट्रीय राज़मार्ग-89) पर भारत में सबसे पवित्र मानी जाने वाली पुष्कर झील स्थित है ।

झील के किनारे कुल 52 घाट बने हुए हैं जिसमें सबसे बड़ा महात्मा गॉधी घाट (गौघाट) है, ब्रह्मघाट एवं वराहघाट भी महत्त्वपूर्ग है|इन घाटों का निर्माण 944 ईं. में मण्डोर के शासक नाहरराव परिहार ने करवाया था।

गौघाट का पुनर्निर्माण मराठा सरदारों ने 1809 ई. में करवाया।
कहा जाता है कि गौघाट पर सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्दसिंह ने 1705 ईं. में गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ किया था।

वर्ष 1911 ईं. में इंग्लैण्ड की महारानी मेरी की यात्रा की याद में पुष्कर के किनारे 'क्वीन मेरी जनाना घाट' बनवाया गया। पद्म पुराण के अनुसार पुष्कर सरोवर का निर्माण प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा करवाया गया था।

झील के किनारे ब्रह्माजी का भारत में एकमात्र प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एवम ब्रह्माजी की मूर्ति की स्थापना आदि शंकराचार्य ने करवाईं थी।
बाद में वर्तमान मंदिर का निर्माण गोकुलचन्द पारीक ने 1809 विक्रमी में करवाया (1752 ई.)।

झील के किनारे सावित्री मंदिर (रत्नगिरी पर्वत की चोटी पर) , रंगनाथ जी (रमा बैकुण्ड) का मंदिर (दक्षिण भारतीय शेली में), बराह मंदिर , आल्मेंश्वर महादेब मंदिर एवं गायत्री मंदिर स्थित हैं।

झील के निकट ही 'बूढा (वृहद) पुष्कर ' एवं कनिष्ठ पुष्कर ' नामक तीर्थस्थल स्थित हैं ।

पुष्कर झील के किनारे आमेर के राजा मानसिंह प्रथम द्वारा निर्मित मान महल स्थित है, जहां वर्तमान में आर.टी.डी.सी. द्वारा 'होटल सरोवर' संचालित किया जा रहा है ।

पुष्कर में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिवसीय विशाल मेला भरता है, क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा को पुष्कर सरोवर में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्त्व है।
इस दौरान यहां विशाल पशु मेला भी आयोजित होता है ।

कनाडा के सहयोग से इस झील को गहरा व स्वच्छ रखने की योजना चल रही है।

नक्की झील (सिरोही)-



राजस्थान में सर्वाधिक ऊँचाई (1300 मी.) पर स्थित नक्की झील सिरोही जिले में आबूपर्वत पर स्थित है।
भूगोलवेत्ताओँ के अनुसार यह एक 'ज्वालामुखी क्रेटर झील' है।
एक किंवदन्ती के अनुसार देवताओं ने अपने नाखूनों से इस झील क्रो खोदा था । इसी कारण इसका नाम नक्की झील' पडा ।
झील के किनारे रघुनाथ जी का मंदिर, टॉड रॉक, नन रॉक, पैरेंट रॉक, राम झरोखा गुफा, हाथी गुफा एवं चम्पा गुफा स्थित हैँ ।

आनसागर झील (अजमेर)-



अजमेर के निकट नागपहाड़ की तलहटी मे पृथ्वीराज चौहान के पितामह आनाजी ने इस झील का निर्माण 1137 ईं. में करवाया था।
इसके निकट एक पहाडी पर बजरंग गढ़ (हनुमान मंदिर) स्थित है।

इसके किनारे बारादरी का निर्माण शाहजहां ने 1637 ईं. में करवाया था तथा दोलतबाग, जो कि अब सुभाष उद्यान के नाम से जाना जाता है , का निर्माण मुगल बादशाह जहांगीर ने करवाया।

फॉय सागर (अजमेर)-



अजमेर के निकट ही वर्ष 1891-92 में अकाल राहत कार्यों के दोरान एक अंग्रेज अभियन्ता श्री फाय ने बांडी नदी पर बाँध बनाकर फॉयसागर झील का निर्माण करवाया, जो वर्तमान में एक खूबसूरत पिकनिक स्थल है,अधिक भरने पर इसका पानी आनासागर झील में जाता है।

सिलीसेढ झील (अलवर)-


अलवर से 13 किमी. दूर चारों ओर से अरावली पर्वतमालाओं से घिरी सिलीसेढ़ झील लगभग 10 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैली है।
इस झील के किनारे 1845 ईं. में अलवर के महाराजा विनयसिंह ने अपनी रानी शीला के लिए एक शाही शिकारगाह (लॉज) एवं छह मंजिला सुंदर महल बनवाया। इस महल में अब 'होटल लैक पैलेस' (R.T.D.C.) संचालित किया जा रहा है 

कोलायत झील (बीकानेर)-



बीकानेर रने 50 किमी. दक्षिण में बीकानेर-जैसलमेर मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग-15) पर कोलायत कस्बे के निकट कपिल मुनि की तपोस्थली 'कोलायत झील' स्थित है। कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रणेता थे।

यहॉ पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेले का आयोजन होता है। इस मेले में 'दीपदान' का विशेष महत्व है।

नवल सागर/नवलखा झील (बूँदी)-



बूंदी के दुर्ग (तारागढ़) की पहाडी के तलहटी में राजा उम्मेदसिंह द्वारा इस झील का निर्माण करवाया गया।

झील के मध्य में जल देवता 'वरुण' का मंदिर आधा डूबा हुआ है।
इस झील के किनारे यहाँ के शासक विष्णुसिंह ने अपनी रामी सुंदरशोभा के लिए सुन्दर महल एवं सुन्दरघाट का निर्माण करवाया।

गैप सागर (डूंगरपुर) (गैब सागर/गैप सागर)-



इस झील का निर्माण महारावल गोपीनाथ ने करवाया था। इसके किनारे 'उदय विलास महल' एवं 'राज राजेश्वर मंदिर' स्थित है।
झील के भीतर बादल महल एवं इसकी पाल पर महारावल पुंज़राज द्वारा निर्मित्त गोवर्धन नाथ का मंदिर (श्रीनाथ मंदिर), निकट ही फतेहगढी, विवेकानन्द स्मारक, राजा बलि, वागड की मीरां,गवरी बाईं, नाना भाई एवं काली बाईं की प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैँ।

बालसमन्द झील (जोधपुर)-


1159 ईं. में मण्डोर के शासक बालकराव प्रतिहार द्वारा निर्मित इस झील के किनारे 'होटल लैक पैलेस' स्थित है

कायलाना झील (जोधपुर)-



इस झील का निर्माण जोधपुर राजपरिवार के सर प्रताप ने करवाया था।
वर्तमान में झील के किनारे माचिया सफारी पार्क (मृगवन) स्थित है ।

उदयसागर झील (उदयपुर)-



महाराणा उदयसिंह द्वारा 1559 से 1564 ई. तक की अवधि में इसका निर्माण किया गया।

आयड़ नदी एसमें आकर गिरती है एवं बेड़च के नाम से निकलती है।

पन्नालाल शाह का तालाब (खेतड़ी, झुंझुनू)-


1870 में सेठ पन्नालाल शाह ने बनवाया।
खेतड़ी के राजा अजीतसिंह के आमंत्रण पर पधारे स्वामी विवेकानंद को इसी तालाब के किनारे बने आवास में ठहराया गया था।

गड़सीसर तालाब (जैसलमेर)-


इसका निर्माण सन 1340 ई. में रावल गड़सीसिंह ने जैसलमेर शहर के निकट करवाया था।
या तालाब 1965 तक पेयजल स्त्रोत था।
इस सरोवर का मेहराबनुमा मुख्य द्वार टीलो नामक एक वेश्या ने बनवाया था। (टीलो की पोल)
इसके किनारे जैसलमेर लोक संस्कृति संग्रहालय स्थित है।

Tuesday, 9 April 2019

#भारत_का_इतिहास त्रिपक्षीय संघर्ष #पाल_वंश #प्रतिहार_वंश #राष्ट्रकूट_वंश

प्राचीन इतिहास की समाप्ति वर्धन वंश के अंतिम समय और आठवी सदी से दसवीं सदी के बीच उत्तर भारत में तीन वंशो ( #पाल_वंश #प्रतिहार_वंश #राष्ट्रकूट_वंश ) के बीच 100 वर्षों तक संघर्ष चला जिसे इतिहास में त्रिपक्षीय संघर्ष के नाम से जाना गया हैं यह संघर्ष तत्कालीन सता के प्रमुख केंद्र कन्नौज को लेकर था क्योंकि कनौज पर शासन स्थापित करने का अर्थ था उपरी गंगा घाटी , उसके व्यापार , एंव प्रचुर मात्रा में कृषि संसाधनों पर नियन्त्रण क्र लेना था इसिलए इन तीनो वंशो के बीच संघर्ष हुआ!-By Dharmendar Gour
प्रमुख शासक तीनो वंशो के
वंश पाल वंश प्रतिहार वंश राष्ट्रकूट वंश
क्षेत्र बंगालगुजरात राजस्थानकर्नाटक, महाराष्ट्र
 गोपालनागभट प्रथमदन्तिदुर्ग
 धर्मपालवत्सराजकृष्ण प्रथम
 देवपालनागभट द्वितीयध्रुव
 विग्रहपालमिहिरभोजगोविन्द III
 नारायणपाल महेन्द्रपाल प्रथमअमोधवर्ष
 महिपाल प्रथममहिपाल प्रथमकृष्ण द्वितीय
 रामपाल इंद्रा III

पाल वंश (पूर्वी भारत बंगाल क्षेत्र)

गोपाल

गोपाल पाल को पाल वंश का संस्थापक माना जाता है
गोपाल पाल बौद्ध धर्म का अनुयाई था
गोपाल ने बिहार सरीफ के निकट औदंतिपुर विहार की स्थापना करवाई

धर्मपाल


उसने विस्तार नीति का अनुसरण करके पुरे मगध को अपने राज्य में शामिल क्र लिया था
धर्मपाल ने महाराजाधिराज, परमभट्टारक तथा परमेश्वर की उपाधि धारण की थी
धर्मपाल को उत्तरापथ कहा जाता है
धर्मपाल ने भागलपुर बिहार में विक्रमशीला विश्वविद्यालय की स्थापना करवाई

देवपाल


देवपाल योग्यएवं महत्वाकांक्षी शासक था
गोपाल पाल ने युद्ध में हूणों को परास्त किया था
गोपाल पाल ने प्रतिहार वंश के प्रसिद्ध शासक मिहिर भोज को युद्ध में पराजित किया था
देवपाल का शासन क्षेत्र हिमालय से लेकर विंध्याचल तक फैला हुआ था
देवपाल के दरबार में बौद्ध कवि वज्रदत्त रहता था,वज्रदत्त ने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘लोकेश्वरशतक’ की रचना की थी

विग्रहपाल प्रथम


विग्रहपाल को प्रतिहार शासक मिहिरभोज प्रथम ने युद्ध में पराजित किया था!

नारायणपाल


नारायणपाल के समय पाल साम्राज्य की शक्ति क्षीण होने लगी थी,
पाल वंश के इतिहास में नारायणपाल के काल को अवनत काल के नाम से जाना जाता है

महीपाल प्रथम


महीपाल प्रथम एक अत्यंत पराक्रमी योग्य शासक था
चोल वंश के राजा राजेंद्र ने महीपाल पर आक्रमण किया था और इस युद्ध में महीपाल की पराजय हुई

विग्रहपाल तृतीय


पाल वंश का अंतिम पराकर्मी शासक था इसके बाद पाल वंश का इतिहास समाप्त होने लगा

गुर्जर प्रतिहार वंश (उतरी पच्छिमी गुजरात पच्छिमी मध्यप्रदेश व राजस्थान का क्षेत्र )

नागभट्ट प्रथम


प्रतिहार वंश के संस्थापक नागभट्ट प्रथम था !
इसकी राजधानी उज्जैन थी और राजस्थान में भीनमाल थी!
नागभट्ट प्रथम के समय अरबों का भारत पर आक्रमण हुआ!

वत्सराज


प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक वत्सराज था !
सम्राज्य विस्तार के क्रम में कन्नौज पर आक्रमण की शुरुआत पच्छिम की और से वत्सराज ने ही की थी
वत्सराज ने कन्नौज पर आधिपत्य को लेकर पाल शासक धर्मपाल को भी परास्त किया!
राष्ट्रकूट के शासक ध्रुव के हाथों वत्सराज की हार हुई!

नागभट्ट द्वितीय


नागभट्ट द्वितीय ने चकरायुद्ध को परास्त कर कन्नौज को राजधानी बनाया
पाल शासक धर्मपाल को भी परास्त किया.
राष्ट्रकूट शासक गोविंद तृतीय के हाथों परास्त हुआ।

मिहिर भोज


प्रतिहार वंश के सबसे शक्तिशाली शासक मिहिर भोज थे !
मिहिर भोज की जानकारी अरब यात्री सुलेमान के विवरण से मिलती है
मिहिरभोज पहले पाल शासक देवपाल से हारा और राष्ट्रकूट शासक गोविंद तृतीय से भी हारा लेकिन पुनः पाल शासक नागभट्ट को हराया और राष्ट्रकूट शासक कृष्ण द्वितीय को भी हराया ।
मिहिर भोज ने आदिवराह और प्रभास की उपाधि धारण किया

महेंद्रपाल प्रथम


महेंद्रपाल के दरबार में प्रसिद्ध विद्वान राजशेखर रहते थे
राजशेखर ने काव्यमीमांसा, बाल भारत, भुवनकोश , कर्पूरमंजरी, बाल रामायण,विद्धशालभंजिका, और हरिविलास की रचना की

महिपाल


समय बगदाद यात्री अल मसूदी ने भारत की यात्रा किया।
महिपाल के समय प्रतिहार वंश का विघटन प्रारंभ हो गया
समय 1018 में मोहम्मद गजनबी ने कन्नौज पर आक्रमण कर आधिपत्य कायम कर लिया

अंतिम शासक

यशपाल


राष्ट्रकूट वंश (दक्षिण भारत कर्नाटक,महाराष्ट्र का क्षेत्र)

दंतिदुर्ग


राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक दंतिदुर्ग थे
दंतिदुर्ग ने अपनी राजधानी मान्यखेत शोलापुर के निकट, (वर्तमान का मानखेड़ ) को बनाया
दंतिदुर्ग ने महाराजधिराज, परमेश्वर तथा परम भटनागर की उपाधि धारण कि

कृष्ण प्रथम


कृष्ण प्रथम ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित एलोरा का प्रसिद्ध कैलाश मंदिर बनवाया

ध्रुव


इन्होंने श्रीवल्लभ तथा धारावर्ष की उपाधि धारण किया
चालुक्य नरेश विष्णु वर्मन तथा पल्लव नरेश नंदीवर्मन को हराया और कन्नौज पर अधिकार करने हेतु त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लिया
प्रतिहार नरेश वत्सराज और पाल नरेश धर्मपाल को पराजित किया।

गोविंद तृतीय


राष्ट्रकूट वंश के सबसे शक्तिशाली शासक हुए इन्होंने भी प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय और पाल शासक धर्मपाल को हराया

अमोघवर्ष

ये शांतिप्रिय तथा विद्वान थे उन्होंने कविराजमार्ग नामक कन्नड़ की रचना कि
इनके दरबार में गणितसार संग्रह के रचनाकार महावीराचार्य और अमोघवृत्ति की रचनाकार साकतायन रहते थे आदि पुराण की रचनाकार जिनसेन रहते थे

इंद्र तृतीय


राष्ट्रकूट वंश के अंतिम शक्तिशाली शासक इंद्र तृतीय हुआ
मालवा के परमार शासक उपेंद्र को परास्त किया और राजधानी उज्जैनी पर अधिकार कर लिया
प्रतिहार शासक महिपाल को भी परास्त किया तथा कन्नौज पर अधिकार कर लिया
इन्होंने नित्यवर्ष और रत्ताकन्दरपा की उपाधि धारण कि

कृष्ण तृतीय


कृष्ण तृतीय के दरबार में कन्नड़ भाषा का महान कवि तथा शांति पुराण के रचयिता पोन्न रहते

Friday, 5 April 2019

चट्टानें Rocks (आग्नेय शैल , अवसादी शैल, रूपान्तरित शैल

hello Friends Welcome to You दोस्तों आज हम जानेगे चट्टानों के बारे में इस आर्टिकल को पढने के बाद आप निम्न सवालों के जवाब दें पाओगे !

चट्टान किसे कहते हैं?

आग्नेय चट्टान किसे कहते हैं?

अवसादी चट्टान किसे कहते हैं?

कायांतरित चट्टान किसे कहते हैं?

संगमरमर कैसी चट्टान है?

चट्टान कैसे बनती है?

चट्टान के उदाहरण?

पृथ्वी के उपरी परत अर्थात भूपर्पटी ओअर मिलने वाले पदार्थ चट्टान या शैल कहलाती हैं

शैलें अपने गुण, कणों के आकार और उनके बनने की प्रक्रिया के आधार पर विभिन्न
प्रकार की होती हैं। निर्माण क्रिया की दृष्टि से शैलों के तीन वर्ग हैं:-
Rocks

(क) आग्नेय शैल
(ख) अवसादी और
(ग) रूपान्तरित।

क) आग्नेय शैल 

’’इंगनियस‘‘ अंग्रेजी भाषा का शब्द है। यह लैटिन भाषा के ’’इंग्निस‘‘ शब्द से बना है। ’’इंग्निस‘‘ शब्द का अर्थ अग्नि से है। इससे इन शैलों की उत्पत्ति स्पष्ट होती है अर्थात वह शैल जिनकी उत्पत्ति अग्नि से हुई है, उन्हें आग्नेय शैल कहते हैं। आग्नेय शैलें अति तप्त चट्टानी तरल पदार्थ, जिसे मैग्मा कहते हैं, के ठण्डे होकर जमने से बनती हैं। भूगर्भ में मैग्मा के बनने की निश्चित गहराई की हमंे जानकारी नहीं है। यह सम्भवतः विभिन्न गहराइयों पर बनता है जो 40 किलोमीटर से अधिक नहीं होती। शैलों के पिघलने से आयतन में वृद्धि होती हैं, जिसके कारण भूपर्पटी टूटती है या उसमें दरारें पड़ती हैं। इन खुले छिद्रों या मुखों के सहारे ऊपर से पड़ने वाले दबाव में कमी आती है। इससे मैग्मा बाहर निकलता है। अगर ऐसा न हो तो ऊपर से पड़ने वाला अत्यधिक दाब मैग्मा को बाहर जाने नहीं देगा। जब मैग्मा धरातल पर निकलता है तो उसे लावा कहते हैं। पिघला हुआ मैग्मा, भूगर्भ में या पृथ्वी की सतह पर जब ठंडा होकर ठोस रूप धारण करता है तो आग्नेय शैलों का निर्माण होता है। पृथ्वी की प्रारम्भिक भूपर्पटी आग्नेय शैलों से बनी है, अतः अन्य सभी शैलों का निर्माण आग्नेय शैलों से ही हुआ है। इसी कारण आग्नेय शैलों को जनक या मूल शैल भी कहते हैं। भूगर्भ के सबसे ऊपरी 16 किलोमीटर की मोटाई में आग्नेय शैलों का भाग लगभग 95 प्रतिशत है। आग्नेय शैलें सामान्यतया कठोर, भारी, विशालकाय और रबेदार होती हैं। निर्माण-स्थल के आधार पर आग्नेय शैलों को दो वर्गों में बाँटा गया है। बाह्य या बहिर्भेदी (ज्वालामुखी) और आन्तरिक या अन्तर्भेदी आग्नेय शैल।

 (i)बाह्य या बहिर्भेदी बाह्य आग्नेय शैलें धरातल पर लावा के ठण्डा होकर जमने से बनी है। इन शैलों की रचना में लावा बहुत जल्दी ठण्डा हो जाता है। लावा के जल्दी ठण्डा होने से इनमें छोटे आकार के रवे बनते हैं। इन्हें ज्वालामुखी शैल भी कहते हैं। गेब्रो और बैसाल्ट बाह्य आग्नेय शैलों के सामान्य उदाहरण हैं। ये शैलें ज्वालामुखी क्षेत्रों में पाई जाती हैं। भारत के दक्कन पठार की ’’रेगुर‘‘ अथवा काली मिट्टी लावा से बनी है।

 (ii) आन्तरिक या अन्तर्भेदी आन्तरिक आग्नेय शैलों की रचना मैग्मा के धरातल के नीचे जमने से होती है। धरातल के नीचे मैग्मा धीरे-धीरे ठण्डा होता है। अतः इन शैलों मंे बड़ आकार के रवे बनते हैं। अधिक गहराई में पाई जाने वाली आन्तरिक शैलों को पातालीय आग्नेय शैल कहते हैं। ग्रेनाइट और डोलाराइट आन्तरिक आग्नेय शैलों के सामान्य उदाहरण हैं। दक्कन पठार और हिमालय क्षेत्रा में ग्रेनाइट शैलों के विस्तृत भूखण्ड देखे जा सकते हैं। आन्तरिक आग्नेय शैलों की आकृति कई प्रकार की होती है।  भूपर्पटी में मैग्मा के ठण्डा होने पर विभिन्न आकृतियों में आग्नेय शैल बनती है। ये आकृतियाँ शैलों मंे प्राप्त स्थान तथा मैग्मा के दवाब पर निर्भर करती है। बैथोलिथ, सिल और डाइक, इसके उदाहरण हैं। बैथोलिथ बड़े आन्तरिक आग्नेय चट्टानी पिंड हैं। इनका आकार कुछ सौ किलोमीटर से हजारों किलोमीटर तक होता है। यह विश्व के बड़े पर्वत-समूहों के स्थूल क्रोड हैं। लाखों वर्षों के अपरदन के कारण कभी-कभी उनकी असमान गुम्बदनुमा छत धरातल पर दिखाई देने लगती है।
पूर्ववर्ती शैलों के बीच मैग्मा के समानान्तर तहों के रूप में जमने के स्वरूप को सिल कहते हैं।
डाइक शैलों के बीच मैग्मा का लम्बवत जमाव है। इनकी लम्बाई कुछ एक मीटर से लेकर कई किलोमीटर तथा चैड़ाई कुछ एक सेन्टीमीटर से लेकर सैंकड़ों मीटर तक हो सकती है।

रासायनिक गुणों के आधार पर आग्नेय शैलों को दो वर्गों में  विभाजित किया जा सकता है -
अम्लीय और क्षारीय शैल।
ये क्रमशः अम्लीय और क्षारीय लावा के जमने से बनती है।
अम्लीय आग्नेय शैलों में सिलीका की मात्रा 65 प्रतिशत होती है। इनका रंग बहुत हल्का होता है। ये कठोर और मजबूत शैल है। ग्रेनाइट इसी प्रकार की शैल का उदाहरण है।
 क्षारीय आग्नेय शैलों में सिलीका की मात्रा अम्लीय शैलों से कम पाई जाती है। इनमें सिलीका की मात्रा 55 प्रतिशत से कम होती है। ऐसी शैलों में लोहा और मैगनीशियम की अधिकता है। इनका रंग गहरा और काला होता है। इन पर ऋतु अपक्षय का बहुत प्रभाव पड़ता है। गैब्रो, बैसाल्ट तथा डोलेराइट क्षारीय शैलों के उदाहरण हैं।

(ख) अवसादी शैलें

इन शैलों की रचना अवसादों के निरन्तर जमाव से होती है। ये अवसाद किसी भी पूर्ववर्ती शैल - आग्नेय, रूपान्तरित या अवसादी शैलों का अपरदित मलवा हो सकता है। अवसादों का जमाव परतों के रूप में होता है। इसलिए इन शैलों को परतदार शैल भी कहते हैं। इन शैलों की मोटाई कुछ मि. मी. से लेकर कई मीटर तक होती है। इन शैलों की परतों के बीच में जीवाश्म भी मिलते हैं। जीवाश्म प्रागैतिहासिक काल के पशु और पौधों के अवशेष हैं। ये अवशेष अवसादी शैलों की परतों में दबकर भार पड़ने के कारण ठोस रूप धारण कर लेते हैं। धरातल पर अधिकतर अवसादी शैलों का विस्तार मिलता है, परन्तु ये शैलें कम गइराई तक ही मिलती हैं। शैलों से पहले अनेकों कण टूटते हैं और फिर उन टूटे कणों को परिवहन के कारक बहता-जल, समुद्री लहरें, हिमानी, पवन आदि एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। जब परिवहन के कारकों मंे इन कणों को ढोने की शक्ति में कमी आती है तो वे समुद्र, झील या नदी के शांत जल मंे अथवा अन्यत्रा उपयुक्त स्थानों पर जमा हो जाते हैं। ढोकर लाये गये शैलों के कणों के किसी स्थान पर जमा होने की प्रक्रिया को अवसादन या निक्षेपण कहते हैं। अवसादी शैलों का नाम अवसाद ढोने वाले कारकों और उनके जमाव स्थल के संदर्भ में रखा जाता है। जैसे नदी-नदीकृत शैल, झील-सरोवरी शैल, समुद्र-समुद्रकृत शैल, मरुस्थल-पवनकृत शैल, हिमानी-हिमानीकृत शैल, आदि। अवसाद प्रायः बारीक कणों से निर्मित मुलायम परत होती हैं। प्रारम्भ में ये बालू मिट्टी के रूप मंे होते हैं। कालान्तर में यही पदार्थ भारी दवाब के कारण संयुक्त रूप धारण कर ठोस बन जाते हैं और अवसादी शैलों का निर्माण करते हैं। प्रारम्भ में अवसादी शैलों का जमाव क्षैतिज रूप में होता है। बाद में चलकर भूपर्पटी मंे हुई हलचलों के कारण झुकाव पैदा हो जाते हैं। बलुआ पत्थर, शैल, चूना पत्थर और डोलोमाइट अवसादी शैलें हैं। परिवहन के विभिन्न कारक जैसे बहता जल, पवन या हिमानी अवसादों को अलग-अलग आकारों मंे छाँटते रहते हैं। विभिन्न आकार के अवसाद अनुकूल परिस्थितियाँ पाकर एक दूसरे से जुड़ जाते हैं। कांगलोमरेट इस प्रकार की अवसादी शैल का उदाहरण है। इस प्रकार की प्रक्रिया से बनी शैलों को भौतिक अवसादी शैल कहते हैं। पेड़- पौधों अथवा जानवरों से प्राप्त जैवीय पदार्थों के एकीकरण से बनी अवसादी शैलें जैविक मूल की शैल होती है। कोयला और चूना पत्थर जैविक मूल की अवसादी शैलें हैं। अवसादों की रचना रासायनिक प्रक्रिया से भी संभव है। जल अपनी घुलन क्रिया के द्वारा शैलों से बहुत सारे रासायनिक तत्व ग्रहण कर अवसाद के रूप में जमा करता रहता है। यही अवसाद कालान्तर में शैल बन जाता हैं। सेंधा नमक, जिप्सम, शोरा आदि सब इसी प्रकार की शैलें है। संसार के विशालकाय बलित पर्वतों जैसे हिमालय, एण्डीज आदि की रचना शैलों से हुई है। संसार के सभी जलोढ़ निक्षेप भी अवसादों के एकीकृत रूप हैं। अतः सभी नदी द्रोणियों विशेषकर उनके मैदान तथा डेल्टा अवसादों के जमाव से बने हैं। इनमें सिंधु-गंगा का मैदान और गंगा-ब्रह्मपुत्रा का डेल्टा सबसे उत्तम उदाहरण है।

(ग) रूपांतरित या कायांतरित शैल

पर्वतीय प्रदेशों में अधिकांश शैलों में परिवर्तन के प्रमाण मिलते हैं। ये सभी शैलंे कालान्तर में रूपान्तरित हो जाती हैं। अवसादी अथवा आग्नेय शैलों पर अत्याधिक ताप से या दाब पड़ने के कारण रूपान्तरित शैलें बनती हैं। उच्च ताप और उच्च दाब, पूर्ववर्ती शैलों के रंग, कठोरता, गठन तथा खनिज संघटन में परिवर्तन कर देते हैं। जहाँ शैलें गर्म-द्रवित मैग्मा के संपर्क में आती हैं, वहाँ उनकी रचना में परिवर्तन आ जाता है। इस परिवर्तन की प्रक्रिया को रूपान्तरण और कायांतरण कहते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा बनी शैल को रूपांतरित शैल कहते हैं। भूपर्पटी में मौजूद अत्यधिक ऊष्मा के प्रभाव से अवसादी और आग्नेय शैलों के खनिजों में जब रवों का पुनर्निर्माण अथवा रूप में परिवर्तन होता है तो उसे तापीय रूपान्तरण अथवा संस्पर्शीय रूपान्तरण कहते हैं। जब द्रवित मैग्मा अथवा लावा शैलों के संपर्क में आता है तो शैलों के मूल रूप में परिवर्तन ला देता हैं। इसी प्रकार भारी दबाव के कारण शैलों में परिवर्तन होता है। दबाव के कारण हुए परिवर्तन को गतिक या प्रादेशिक रूपान्तरण कहते हैं। स्लेट, नीस-शीस्ट, संगमरमर और हीरा रूपान्तरित शैलों के उदाहरण हैं। रूपान्तरित शैल अपनी मूल शैलों से अधिक कठोर और मजबूत होती हैं।
संसार में विभिन्न प्रकार की रूपान्तरित शैलें पाई जाती हैं। भारत में संगमरमर
राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश में मिलता है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और कुमायूँ
क्षेत्रा में विभिन्न रंगों की स्लेट मिलती है।
Rupantrit chattan

Saturday, 16 March 2019

Rsmssb Patwari Pre syllabus 2019 download pdf

नमस्कार दोस्तों आपका Online Education Website पर स्वागत है|
आज हम जानेगे कि Rsmssb Patwari Pre का Syllabus क्या है और Rsmssb Patwari Pre का Syllabus की Pdf Download कैसे करे
इस आर्टिकल में patwari से संबधित सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गये हैं जैसे

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पटवारी भर्ती परीक्षा-2019 प्रारम्भिक परीक्षा की स्कीम एवं पाठ्यक्रम

(क) प्रारम्भिक परीक्षा की स्कीम-


प्रश्न पत्रविषयअधिकतम अंकसमय
सामान्य ज्ञान,गणित,कम्प्युटर एवं हिन्दीसामान्य ज्ञान (राजस्थान का इतिहास,परम्पराएँ एवं विरासत, भारत का संविधान,राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था,राजस्थान का भूगोल एवं दैनिक विज्ञान)1003:00घण्टे
(गणित) तार्किक एवं आधारभूत संख्यात्मक अभियोग्यता100
बेसिक कम्प्युटर50
हिन्दी50
कुल योग300



नोट-1. प्रश्न पत्र में बहुविकल्पीय प्रकार के 180 प्रश्न होंगे व सभी प्रश्नों के अंक समान होंगे।
2. मूल्यांकन में ऋणात्मक अंकन किया जायेगा, जिसमें प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/3 अंक काटे जाएंगे।
3. प्रारम्भिक परीक्षा के उपरांत मुख्य परीक्षा के लिये कुल रिक्तियों के वर्गवार 15 गुना अभ्यर्थियों को योग्य घोषित किया जायेगा।

मुख्य परीक्षा के लिये योग्य घोषित करते समय बोर्ड द्वारा निर्धारित योग्यता सूची के अंतिम प्राप्तांक पर समान अंक पाने वाले सभी अभ्यर्थियों को योग्य माना जायेगा।

(ख) प्रारम्भिक परीक्षा पाठ्यक्रम

(1) सामान्य ज्ञान - (राजस्थान का इतिहास, कला एवं संस्कृति, साहित्य, परम्पराएँ एवं विरासत)
1. राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत
2. राजस्थान की प्रमुख प्रागैतिहासिक सभ्यतायें
3. राजस्थान के प्रमुख राजवंश एवं उनकी उपलब्धियां
4. मुगल-राजपूत संबंध
5. स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषताएँ।
6. महत्वपूर्ण किले, स्मारक एवं संरचनाये
7. राजस्थान के धार्मिक आंदोलन एवं लोक देवी-देवताएँ
8. राजस्थान की प्रमुख चित्रकलाएँ, शैलियां एवं हस्तशिल्प
9. राजस्थानी भाषा एवं साहित्य की प्रमुख कृतियां, क्षेत्रीय बोलियां
10. मेले, त्यौहार, लोक संगीत, लोक नृत्य, वाद्ययंत्र एवं आभूषण
11. राजस्थानी संस्कृति, परंपरा एवं विरासत
12. महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पर्यटन रथल।
13. राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व
14. राजस्थान की रियासतें एवं ब्रिटिश संधियां, 1857 का जन-आंदोलन
15. कृषक एंव जनजाति आंदोलन, प्रजामंडल आंदोलन
16. राजस्थान का एकीकरण
17. राजस्थान का राजनीतिक जनजागरण एंव विकास– महिलाओं के विशेष संदर्भ में ।

भारत का संविधान, राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था-

1. भारतीय राजनीतिक व्यवस्था :- भारत का संविधान, संघीय कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्याय पालिका, मौलिक अधिकार, कर्त्तव्य, नीति निर्देशक तत्व।
2. राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य विधानसभा, उच्च न्यायालय, जिला प्रशासन, राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग, राज्य महिला आयोग।
3. लोक नीति, विधिक अधिकार एवं नागरिक अधिकार-पत्र
4. राजस्थान में स्थानीय स्वशासन : ग्रामीण एवं नगरीय निकाय, मुख्य विशेषताएँ, संरचना, शक्तियां, समस्याएँ, 73 वां एवं 74वां संवैधानिक संशोधन विधेयक 5. स्वातंत्र्योत्तर राजस्थान राजव्यवस्था की प्रमुख प्रवृत्तियां एवं महत्वपूर्ण पदचिन्ह (Major landmark)

राजस्थान का भूगोल

1.स्थिति एवं विस्तार
2.मुख्य भौतिक विभाग :- मरूस्थलीय प्रदेश, अरावली पर्वतीय प्रदेश, मैदानी प्रदेश, पठारी प्रदेश
3.अपवाह तन्त्र
4.जलवायु
5.मृदा
6.प्राकृतिक वनस्पति
7.वन एवं वन्य जीव संरक्षण
8.पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय मुददे
9.मरूस्थलीकरण
10. कृषि-जलवायु प्रदेश एवं प्रमुख फसलें
11. पशुधन
12. बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
13. सिंचाई परियोजनाएँ
14. जल संरक्षण
15. परिवहन
16. खनिज सम्पदाएँ
17. भूमापन, सर्वेक्षण, जरीब व फीता सर्वेक्षण, जरीब के प्रकार व उनकी सर्वेक्षण की विशेषताएँ व समस्याएँ।

दैनिक विज्ञान

1. तत्व, यौगिक एवं मिश्रण
2. भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन (Physical and Chemical Changes); ऑक्सीकरण एवं अपचयन अभिक्रियाएँ (Oxidation and reduction reactions) द्धय उत्प्रेरक (Catalysts)
3. धातु, अधातु एवं इनके प्रमुख यौगिक (Metals, non-metals and their important compounds); सामान्य जीवन में प्रयुक्त कुछ महत्वपूर्ण यौगिक (Some important compounds used in daily life)
4. प्रकाश का परावर्तन व इसके नियम (Reflection of light and its laws); प्रकाश का वर्ण विक्षेपण (Dispersion of light); लेंस के प्रकार (Types of lenses); दृष्टि दोष तथा उसका निवारण (Defects of vision and their corrections)
5. विद्युत (Electricity): विद्यधुत धारा (Electric current); ओम का नियम (Ohm's law); विद्युत सेल (Electric cell); फैराडे के विद्युत चुम्बकीय-प्रेरण के नियम (Faraday's laws of electromagnetic induction); विद्युत जनित्र (Electric generator); विद्युत मोटर (Electric Motor);
6.मानव मस्तिष्क (Human brain), हार्मोन्स (Harmones), मानव रोग के कारण एवं निवारण (Human disease-Causes and cures)
7. जन्तुओं एवं पादपों का आर्थिक महत्व (Economic importance of animals and plants)
8. बायोमास, उर्जा के विभिन्न स्त्रोत (Sources of energy), पारिस्थितिक तन्त्र (Ecosystem)
9.मानव रोग कारण एवं निवारण
10.मनुष्य में पाचन एवं उत्सर्जन संस्थान का प्रारंभिक ज्ञान (Priliminay knowledge of digestive and Excretory sustain in hurman), आक्सीय एवं अनाक्सीय श्वसन (Aerobic and anaerobic respiration), किण्वन (Fermentation), क्रेब्स चक्र (Kreb's cycle), ग्लायकोलिसिस (Glycolysis)
11. आनुवंशिकी से संबंधित सामान्य शब्दावली (General terminology related to Genetics) मेंडल के आनुवांशिकता के नियम (Mendal'd law of inheritance) डी.एन.ए. एवं आर.एन.ए. की संरचना (Structure of DNA and RNA) गुणसूत्र की संरचना (Structure Chromosome), मनुष्य में लिंग निर्धारण (Sex determination in human)
12. , मनुष्य में अन्तःस्त्रावी ग्रंथियों एवं हार्मोन्स (Endoscrine glands and hormons in human),
13. विटामिन का प्रकार एवं इनकी कमी से होने वाले रोग (Type of vitamins and its deficiency disease)
14. रक्त का संगठन (Composition of blood), रक्त समूह (Blood groups) रक्त का थक्का जमना (Coagulation of blood), हृद्य की संरचना एवं कार्य (Structure and function of Heart), एन्टीजन (Antegan), एन्टीबॉडी (Antibody)
15. जैव प्रौद्योगिकी - सामान्य जानकारी, पुनर्योजित DNA तकनीक, ट्रांसजेनिक पादप व जन्तु, जैव पेटेन्ट | (Biopatent), कृषि व चिकित्सा क्षेत्र में जैवप्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग

(2) गणित, तार्किक एवं आधारभूत संख्यात्मक अभियोग्यता

1. आधारभूत संख्यात्मक दक्षता : प्राकृतिक संख्याएं, परिमेय एवं अपरिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार, वास्तविक संख्याओं पर संकियाएं, वास्तविक संख्याओं के लिए घातांक नियम, अनुपात एवं समानुपात, प्रतिशत, लाभ एवं हानि, बट्टा, साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज,समय एवं दूरी, समय एवं चाल, समय एवं कार्य, आंकड़ों का विश्लेषण (माध्य, माध्यिका एवं बहुलक, रेखाचित्र, दण्ड-आरेख एवं पाई-चार्ट)।
2. समतल आकृतियों के परिमाप एवं क्षेत्रफल (त्रिभुज एवं चतुर्भुज)
3. फील्ड बुक
4.वृत्त की परिधि एवं क्षेत्रफल
5.न्यून कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात
6.विशेष कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात (0 डिग्री, 30 डिग्री, 60 डिग्री, 90 डिग्री)
7.ऊँचाई एवं दूरी पर आधारित सरल समस्याएँ।
8.तार्किक दक्षता :
कथन एवं मान्यताएं, कथन एवं तर्क, कथन एवं निष्कर्ष, कारण एवं कार्य, कारण एवं प्रभाव, गद्याश से निष्कर्ष निकालना, प्रश्न एवं कथन।
9. विश्लेषणात्मक तर्क क्षमता :-
व्यवस्थित करना, दिशा बाध, आयु संबंधी शंकाएं।
10. मानसिक योग्यता : संख्या श्रेणी, अक्षर श्रेणी, बेमेल छांटना, कूटवाचन (कोडिंग-डिकोडिंग) संबंध, आकृतियों एवं उनके उपविभाजन से जुड़ी समस्याएं, पद एवं अनुकम, शब्द-निर्माण।

(3) Basic Computer Knowledge:


1. Characteristics of Computers, Input, Output, Storage units, CPU, Computer System, Binary number system, Binary to Decimal Conversation, Decimal to Binary Conversation, ASCII Code, Unicode.

2. Computer Organization- Central Processing Unit- Processor Speed, Cache, Memory, RAM, ROM, Booting, Memory-Secondary Storage Devices: Floppy and Hard Disks, Optical Disks CD-ROM, DVD, MASS Storage Devices: USB thumb drive. Managing disk Partitions, File System Input Devices Keyboard, Mouse, Joystick, Scanner, Web cam, Output Devices- Monitors, Printers-Dot matrix, inkjet, laser, Multimedia- What is Multimedia, Text, Graphics, Animation, Audio, Images, video: Names of common multimedia file formats, Computer Software- Relationship between Hardware and Software; System Software, Application Software, Compiler, Names of some high level languages.

3. Operating System- Microsoft Windows- An overview of different versions of Windows, Basic Windows elements, File management through Windows, Using essential accessories: System tools - Disk cleanup, Disk defragmenter, Calculator, Imaging - Fax, Notepad, Paint, WordPad, Command Prompt Directory navigation, path setting, creating and using batch files, Drives, files, directories, directory structure, Application Management: Installing, Uninstalling, Running applications.

4. Word Processing - Microsoft Word) Word Processing Concepts : saving, closing, Opening an existing document, Selecting text, Editing text, Finding and replacing text, printing documents,Creating Printing Merged Documents Character and Paragraph Formatting, Page Design and Layout, Editing and Profiling Tools: Checking and correcting spellings, Handling Graphics, Creating Tables and Charts.

5. Spreadsheet Package - (Microsoft Excel) Spreadsheet Concepts, Creating, Saving and Editing a Workbook, Inserting, Deleting Work Sheets, entering Data in a cell/formula copying and moving from selected cells, handling operators in Formula, Functions: Mathematical, Logical, statistical, text, financial, Date and Time functions, Using Functions Wizard. Formatting a Worksheet: Formatting Cells- changing data alignment, changing date, number, character or currency format. Changing font, adding borders and colors, printing worksheets. Charts and Graphs- Creating, Previewing, Modifying Charts.

6.Presentation Package-(Microsoft PowerPoint) - Creating, Opening and saving Presentation, Creating the look of Your Presentation. Working in Different Views, Working with Slides, Adding and Formatting Text, Formatting Paragraphs, Checking Spelling and Correcting Typing Mistakes, Making Notes Pages and Handouts, Drawing and Working with Objects, Adding Clip Art and other Pictures,

Designing Slide Shows, Running and Controlling a Slide Show, Printing Presentations.

7. Information Technology and Society - Indian IT Act, Digital Signatures, Application of Information

Technology in Govt. for e-Governance. Mobile/Smart Phones, Information kiosks.

(4) सामान्य हिन्दी


1. संधि और संधि विच्छेद।
2. सामासिक पदों की रचना एवं समास - विग्रह
3. उपसर्ग एवं प्रत्यय ।
4. पर्यायवाची शब्द एवं विलोम शब्द।
5. अनेकार्थक शब्द।
6. शब्द-युग्म्।।
7. शब्द -शुद्धि : अशुद्ध शब्दों का शुद्धिकरण और शब्दगत अशुद्धि का कारण।
8. वाक्य - शुद्धि : अशुद्ध वाक्यों का शुद्धिकरण और वाक्यगत अशुद्धि का कारण
9. वाच्य : कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य प्रयोग।
10. क्रिया : सकर्मक, अकर्मक और पूर्वकालिक क्रियाएँ ।
11. वाक्यांश के लिए एक सार्थक शब्द ।
12. मुहावरे और लोकोक्तियां।
13. अंग्रेजी के पारिभाषिक (तकनीकी) शब्दों के समानार्थक हिन्दी शब्द।।

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Rsmssb Patwari Pre के बारे मे अन्य कोई जानकारी लेने के लिए कमेंट्स बॉक्स मे जाकर आप मुझे कमेंट्स कर सकते हो जिसका आपको आन्सर मिल जायेगा|

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Friday, 15 March 2019

Rpsc 1st grade mathematics syllabus pdf download


नमस्कार दोस्तों आपका Education Website पर स्वागत है|


आज हम जानेगे कि 1st Grade Mathematics का Syllabus क्या है और 1st Grade Mathematics का Syllabus की Pdf Download कैसे करे
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RAJASTHAN PUBLIC SERVICE COMMISSION, AJMER
SYLLABUS FOR EXAMINATION FOR THE POST OF
LECTURER - MATHEMATICS,
(SCHOOL EDUCATION)
Paper - II



Part – I (Senior Secondard Standard)


1 Sets, Relations and Functions :Different kinds of sets and their basic properties, Relations, types of relations, Different types of real valued functions.

2 Limit, Continuity and Differentiability : Limit, continuity and differentiability of algebraic functions, trigonometric functions, exponential functions and logarithmic functions.

3 Complex and Vector Algebra : Complex numbers and their algebraic properties, polar representation, square root of a complex number, Vectors and scalars, types of vectors and their algebraic properties, scalar and vector product of two vectors, scalar triple product.

4 Differential calculus : Derivatives of sum, difference, product and quotient of functions. Derivatives of polynomial and trigonometric functions. Derivatives of implicit and explicit functions. Increasing and decreasing functions. Concept of second order derivative.

5 Integral calculus : Integration of functions by the method of substitution, partial fraction and by parts. Basic properties of definite integrals and their uses to evaluate them.

6 Differential equations : Order and degree of a differential equation, solution of differential equations of first order and first degree.

7 Permutations and combinations : Derivation of formulae, their connections and simple applications.

Binomial theorem : Binomial theorem for positive integral indices, general and middle terms in binomial expansion.

8 Matrices : Various types of matrices, their basic operations and properties. Invertible matrices and their inverse.

Determinant : Determinant of a square matrix and their properties. Solution of system of linear equations in two or three variables using inverse of a matrix.

9 Two dimensional geometry : Straight line, standard equations and simple properties of circle, parabola, ellipse, hyperbola.

10 Applications of derivatives and integrals : Tangent and normals, maxima and minima of functions of one variable. Area under simple curves, area between the simple curves.

11 Statistics : Mean, Mode, Median for grouped data, measure of dispersion. Probability and their elementary laws, conditional probability.





Part – II (Graduation Standard)



1 Group Theory : Groups and their simple properties, order of an element, order of a group, permutation groups, cyclic groups and their properties, subgroups and their basic algebraic properties, cosets and their properties.

2 Normal subgroup and Rings : Normal subgroups and quotient groups, theorems on homomorphism and isomorphism. Rings, ideals, integral domain and fields.

3 Theory of equations : Relation between the roots and coefficients of general polynomial equation in one variable. Transformation of equations. Descartes’ rule of signs, solution of cubic equations by Cardon’s method, Biquadratic equations by Ferari’s method.

4 Calculus : Partial derivatives, curvature, asymptotes, envelopes and evolutes, maxima and minima of functions upto two variables, Beta and Gamma functions, double and triple integrals.

5 Advanced Calculus : Mean value theorems (Rolle’s, Lagrange’s, Taylor’s theorems), sequence and series with convergence properties.

6 Complex Analysis : Continuity and differentiability of complex functions, Analytic functions, Cauchy – Riemman equation, Harmonic functions. Conformal mappings.

7 Ordinary and Partial differential equations : Linear differential equations of first order and higher degree, Clairaut’s form, Linear differential equations of constant coefficients, ordinary homogeneous differential equations, Linear differential equations of second order with variable coefficients. Partial differential equations of first order, solution by Lagrange’s method.

8 Vector calculus : Gradient, divergence and curl, identities related to them. Line, surface and volume integrals. Applications of Gauss, Stoke’s and Green’s theorems.

9 Three dimensional geometry : Direction ratios and cosines, straight line, plane, sphere, cone and cylinder.

10 Statics : Equilibrium of co-planner forces, moments, friction, virtual work catenary.

11 Dynamics : Velocities and acceleration along radial and transverse directions and along tangential and normal directions, simple harmonic motion, Rectilinear motion under variable laws, Hook’s law and problems, projectiles.





Part – III (Post Graduation Standard)


1 Linear Algebra and Metric Space : Vector spaces, linear dependence and independence, bases, dimensions, linear transformations, matrix representation, algebra of matrices, characteristic roots and vectors, determinants, Cayley – Hamilton theorem.

Metric Spaces : Bounded and unbounded metric spaces. Open and closed sets in a metric space, Cantor’s ternary set, closure, bases, product spaces.

2 Integral transforms and special functions : Hyper-geometric functions, Legendre’s polynomials,

Bessel’s functions. Recurrence relations and orthogonal properties. Laplace transform, inverse Laplace transform. Fourier sine and cosine transforms. Convolution theorem.

3 Differential Geometry and Tensors : Curves in spaces, Curvature, Torsion, Skew curvature, Serret - Frenet formulae. Helices Osculating circle and sphere. Types of tensors and their algebraic properties. Christoffel’s symbols, covariant and contravariant differentiation, Geodesics.

4 Numerical Analysis : Newton’s formula for forward and backward interpolation for equal intervals, Divided difference, Newton’s Lagrange’s, Starling’s and Bessel’s interpolation formulae.

5 Optimization Technique’s : Convex set and its properties. Solution of a L.P.P. by using Simplex methods. Duality, Assignment, Transportation and Game theory.





Part – IV

(Educational Psychology, Pedagogy, Teaching Learning Material, Use of computers and Information Technology in Teaching Learning)

1. Importance of Psychology inTeaching-Learning :

* Learner, * Teacher, * Teaching-learning process, * School effectiveness.


2. Development of Learner :

• Cognitive, Physical, Social, Emotional and Moral development patterns and characteristics among adolescent learner.

3. Teaching – Learning :

• Concept, Behavioural, Cognitive and constructivist principles of learning and its implication for senior secondary students.

• Learning characteristics of adolescent and its implication for teaching.


4. Managing Adolescent Learner :

• Concept of mental health and adjustment problems.

• Emotional Intelligence and its implication for mental health of adolescent.

• Use of guidance techniques for nurturing mental health of adolescent.

5. Instructional Strategies for Adolescent Learner :

• Communication skills and its use.

• Preparation and use of teaching-learning material during teaching.

• Different teaching approaches: Teaching models- Advance organizer, Scientific enquiry, Information, processing, cooperative learning.

• Constructivist principles based Teaching.

6. ICT Pedagogy Integration :

• Concept of ICT.

• Concept of hardware and software.

• System approach to instruction.

• Computer assisted learning.

• Computer aided instruction.

• Factors facilitating ICT pedagogy integration.


* * * * * Scheme of Examination


Subject Concerned


S.NO.SubjectNo. Of QuestionTotal Marks
1.Knowledge of Subject Concerned : Senior Secondary Level55110
2.Knowledge of Subject Concerned : Graduation Level55110
3.Knowledge of Subject Concerned : Post Graduation Level1020
4.Education Psychology,Pedology,Teaching Learning Material,Use of Computer and Informations Technology in Teaching Learning3060
Total150300



Note: 1. All the question in the Paper shall be Multiple Choice Type Question.
2. Negative marking shall be applicable in the evaluation of answers. For every wrong answer one-third of the marks prescribed for that particular question shall be deducted.
Explanation : Wrong answer shall mean an incorrect answer or multiple answer.
3. Duration of the paper shall be 3 Hours



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Wednesday, 13 March 2019

बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) परीक्षा 2019 की सम्पूर्ण जानकारी


नमस्कार दोस्तों आपका Education Website पर स्वागत है|आज हम जानेंगे बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) के बारे मे निम्न बाते जो इस प्रकार है-

1. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) क्या है?

बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) एक डिप्लोमा कोर्स है जिसकी अवधि 2 वर्ष है|


2. बी.एस.टी.सी (B.stc) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) को कब कर सकता है?

बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) को 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद कर सकते है?

3. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) को कौन कर सकता है?

-बी.एस.टी.सी (B.s.t.cया डी.एल.एड. (D.El.Ed) को वह कर सकता है जिसने 12वीं 50% अंको के साथ उत्तीर्ण की हो|


नोट- विस्तार से बिन्दु नंबर 8 मे समझाया गया है?

4. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) के फॉर्म कब से भरे जाएंगे?

फॉर्म भरने का शेडुयल-

विवरण

महत्वपूर्ण तिथियाँ

आवेदन शुरू
18 मार्च, 2019 से
परीक्षा शुल्क की अंतिम तिथि
08 अप्रैल, 2019 तक
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि एवं समय
10 अप्रैल, 2019 को रात्रि 12:00 बजे तक
प्रवेश परीक्षा
26 मई, 2019 दोपहर 2:00 बजे से 5:00 बजे तक


5. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) की आयु और शैक्षणिक योग्यता क्या है?

आयु- आवेदक की आयु 1 जुलाई, 2019 को 28 वर्ष से अधिक नहीं हो|विधवा,तलाक़शुदा, एवं परित्यक्ता महिलाओ तथा राजकीय सेवारत शिक्षकों के लिए आयु सीमा मे कोई बंधन नहीं है|अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/आँय पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग व महिलाओ के लिए राजकीय सेवा नियमो के अनुरूप आयु सीमा मे छुट देय होगी|

शैक्षणिक योग्यता- 12वीं कक्षा मे निम्न केटेगरी के अनुसार % उत्तीर्णांक होना जरूरी है|

शिक्षण प्रशिक्षण पाठ्यक्रम
सामान्य
अनु. जाति/अनु. जनजाति
ओबीसी (obc)
(अपिव)
विकलांग
सामान्य वर्ग की विधवा/परित्यवता माहिलाएं
डी.एल.एड. (सामान्य)/ डी.एल.एड.(संस्कृत),2019
50%
45%
45%
45%
45%



6. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) का परीक्षा योजना क्या है?


विषय
प्रश्नों की संख्या
प्रत्येक प्रश्न के अंक
प्रत्येक विषयनुसार कुल अंक
1. मानसिक योग्यता
50
3
150
2. राजस्थान की सामान्य जानकारी
50
3
150
3. शिक्षण अभिरुचि
50
3
150
4. (1) अँग्रेजी
20
3
60
(2) हिन्दी
30
3
90
(3) संस्कृत
30
3
90


कुल पूर्णांक
600



7. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) की कुल कितनी सीटों पर परीक्षा का आयोजन किया जाता है या किया जायेगा?

-19200


8. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) की परीक्षाओ के लिए कितने छात्र फॉर्म भरते है?

-लगभग 5 लाख 


9. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) किसकी नौकरी के लिए करना जरूरी है?

- बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) की डिग्री सिर्फ 3rd grade  शिक्षक बनने के लिए है?


10. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) कोनसी डिग्री है?

-यह एक डिप्लोमा कोर्स है|

नोट- ये ग्रेजुएशन कोर्स नहीं है| जिससे आप बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) की डिग्री करने के बाद ग्रेजुएशन लेवल के कॉम्पटिशन एग्जाम नहीं दे पाते हो|



11. बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) मे किस छात्र का सिलेक्शन पक्का है?

-जो छात्र 600 मे से 420+ अंक लायेगा उसका सिलेक्शन पक्का है|





नोट- सबसे खास बात आज से बी.एस.टी.सी (B.s.t.c-Basic School Teaching Certificate) को डी.एल.एड.  (D.El.Ed-Diploma Elementary Education)  इस नाम से जाना जाएगा, जिसके परीक्षा के आयोजनकर्ता बीकानेर विभाग रहेगा|


आपको बी.एस.टी.सी (B.s.t.c) या डी.एल.एड. (D.El.Ed) की अन्य कोई जानकारी लेने के लिए कमेंट्स बॉक्स मे जाकर आप मुझे कमेंट्स कर सकते हो जिसका आपको आन्सर मिल जायेगा|


ये पोस्ट कैसी लगी कमेंट्स करके जरूर बताये|

न्यवाद....